सवाल : इस बार जनगणना में 2011 के मुकाबले क्या नया होगा?
जवाब : यह पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है, जिसमें सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से बैच बनाकर प्रशिक्षण होगा। हर एक प्रगणन की प्र्रगति रिपोर्ट लाइव देखी जा सकेगी। दूसरी ओर, पेपरलैस जनगणना है। प्रगणक को कागज नहीं बल्कि ऐप के माध्यम से जनगणना करनी है। खास बात ये है कि आम नागरिक भी अपनी मकान गणना और जनगणना खुद कर सकते हैं। इसके लिए जल्द ही पोर्टल लांच होगा। इस पर अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण कराने के बाद जनगणना प्रपत्र भरना होगा। इसके बाद एक आईडी मिलेगी। इस आईडी को संभालकर रखें। जब आपके घर प्रगणक आएगा तो पहले स्व: गणना के बारे में सवाल करेगा। अगर आपने की होगी तो अपनी यह आईडी उन्हें उपलब्ध करानी होगी, जिसमें दिए गए तथ्यों को मौके पर ही सत्यापित किया जाएगा। अन्यथा की स्थिति में प्रगणक अपने ऐप के माध्यम से पूरी जानकारी भरेगा।
सवाल : उत्तराखंड के विषम भौगोलिक क्षेत्रों तक आपकी टीम कैसे पहुंचेगी? क्या हेलिकॉप्टर की मदद लेंगे?
जवाब : जनगणना करने वाले कर्मचारी उसी क्षेत्र के शिक्षक हैं। उन्हें हमारे पास केवल तीन दिन की ट्रेनिंग लेनी है। ऐसा तो नहीं लगता कि हेलिकॉप्टर की जरूरत होगी लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से राज्य सरकार के स्तर से इसमें फैसला लिया जा सकेगा। जनगणना में केंद्र-राज्य मिलकर काम करेंगे।
सवाल : प्रदेश में बड़ी संख्या घोस्ट विलेज की है, जनगणना में उनके लिए क्या होगा?
जवाब : 2011 की जनगणना के हिसाब से प्रदेश में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें से 1048 गैर आबाद थे। हमारी टीम नौ से 28 फरवरी 2027 के बीच हर गांव तक पहुंचेगी। अगर वहां कोई मिलेगा तो उसकी गणना होगी। अगर नहीं तो भी ऐसे गैर आबाद गांवों की गणना हो जाएगी।