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Dehradun News: जौनसार बावर में बूढ़ी दीपावली की तैयारी शुरू, सजाए जा रहे घर

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बूढी दीपावली के लिए धान कूटकर चिवड़ा बनाते ग्रामीण। स्रोत जागरूक पाठक
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- सोमवार को महिलाओं ने धान कूटकर बनाया चिवड़ा, पर्व में बांटा जाता है प्रसाद
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मुकेश जोशी
चकराता। जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में बूढ़ी दीपावली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ग्रामीण पर्व के लिए घरों को सजाने-संवारने में जुटे हुए हैं। धान को कूटकर चिवड़ा बनाया जा रहा है। पर्व में इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
देशभर में मनाई जाने वाली दीपावली के एक माह बाद जौनसार बावर में बूढ़ी दीपावली मनाने की परंपरा है। लोक पर्व पर क्षेत्र के गांवों में उत्साह का वातावरण देखने लायक होता है। रंगकर्मी डॉ. नंदलाल भारती, लोक संस्कृति के जानकर टीकाराम शाह, उपलगांव के सदर स्याणा दिनेश सिंह, खत शैली के सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर के अनुसार कृष्ण पक्ष के आरंभ से ही गांवों में बूढ़ी दीपावली की धूम शुरू हो जाती है। बच्चे सांझ ढलते ही घासफूस से बनी मशाल जिसे स्थानीय भाषा में होले कहा जाता है को जलाना शुरू कर देते हैं। यह परंपरा अमावस्या तक चलती है और इसी दिन से बूढ़ी दीपावली पर्व का शुभारंभ होता है। पांच दिनों तक चलने वाली दीपावली में पहले दिन ग्रामीण मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर भीमल की लकड़ी से बने होले जलाकर होलियात निकालते हैं। दूसरे दिन गांव के स्याणा पंचायती आंगन में अखरोट उछालते हैं, जिसे भिरुड़ी कहा जाता है। ग्रामीण इन अखरोट को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन आयोजित होने वाले जंदोई पर्व पर ग्रामीण काठ का हिरण बनाकर नचाते हैं। पांचवें व अंतिम दिन काठ से बने हाथी पर गांव के स्याणा को बैठाकर नृत्य करते हैं।
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कोरू खत के सभी 17 गांवों में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक चलने वाली दीपावाली मनाई जाती है। जौनसार-बावर क्षेत्र अपनी लोक संस्कृति और रीति-रिवाजों को मनाने के अनोखे अंदाज के लिए प्रसिद्ध है। सभी लोगों से आग्रह भी है कि अपनी इस अमूल्य लोक संस्कृति को बचाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
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सुनील जोशी, सदर स्याणा, कोरू खत

पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हर त्योहार मनाने का अंदाज ही जौनसार की पहचान है। युवा वर्ग को अपनी लोक संस्कृति को सहेजने में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। रोजगार या पढ़ाई के लिए शहर गए लोगों को भी गांव आकर त्योहारों को मनाना चाहिए।
रजनीश पंवार, सदर स्याणा, खत बोंदूर
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