सरकार ने अंबेडकर जयंती को धूमधाम से मनाने के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया है, लेकिन अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के लिए चल रही कल्याण योजनाओं में देने के लिए फंड नहीं है। फंड की कमी के चलते अनुसूचित जाति के काफी आवेदकों को कन्याओं की शादी के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदान ही नहीं मिल पाया है।
इतना ही नहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के निर्धन व्यक्तियों की बीमारी के लिए दिए जा रहे अनुदान की योजना भी इस वर्ष से बंद कर दी गई है। इनके लिए छात्रवृत्ति की योजना भी फंड का अभाव है। ऐसे में सवाल उठता है कि अंबेडकर जयंती मनाना कितना सार्थक है।
कन्याओं की शादी का पैसा भी नहीं
समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति एवं जनजाति की कन्याओं की शादी के लिए पचास हजार रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसके लिए कन्या की शादी से पहले आवेदन करना होता है और यह शादी के बाद मिलता है। पिछले वित्तीय वर्ष की बात करें तो अनुसूचित जाति के 649 लोगों ने आवेदन किए।
इनमें से 306 को ही पैसा मिल पाया। 343 लोगों को अब भी पैसे का इंतजार है। जबकि वित्तीय सत्र के खत्म होते हुए अब बाकी लोगों के आवेदन स्वत: ही निरस्त मान लिए गए हैं। ऐसे लोग दोबारा भी आवेदन नहीं कर सकते। हर्रावाला से पहुंची ऊषा भट्ट अपनी व्यथा बताते हुए रो पड़ीं, बताया कि पति विकलांग हैं, वद्ध ससुर कुछ काम नहीं करते।
ननद की शादी के लिए कर्ज लिया था, विभाग वाले कहते हैं कि अब तुम्हें पैसा नहीं मिल सकता। ऐसे में भला कैसे हम ननद की शादी के लिए लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे। इसी तरह कार्यालय पहुंचे अनुसूचित जाति के कुछ छात्रों ने भी बताया कि उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पूछे जाने पर कर्मचारियों का जवाब था कि बजट नहीं आया।
पहली बार हो रहा है यह प्रयास
इस बार प्रशासन के सहयोग से समाज कल्याण विभाग अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है। केंद्र से मिले दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत गांव-गांव तक अंबेडकर जयंती पर उनकी जीवनी, शपथ-पत्र और समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का ब्रोशर दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं का लाभ ले सकें। इसके साथ ही सभी स्कूलों में भी इस बार से अंबेडकर जयंती मनाई जाएगी लेकिन सवाल यह है कि जब बजट ही नहीं है तो फिर इन योजनाओं के प्रचार का क्या फायदा।
इनका है कहना
यह योजनाएं पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर चलती हैं। अनुसूचित जाति कन्या योजना के लिए कई आवेदन आते हैं, लेकिन सभी को पैसा देना मुश्किल हो जाता है। इस साल भी जितना बजट था, उतना दे दिया गया और बाकी आवेदनों को निरस्त मान लिया गया। अब अगले साल के आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। एक आवेदक एक ही बार आवेदन कर सकता है।
-अनुराग शंखधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी