हाईकोर्ट के थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश से पुलिस वाले सकते में हैं। क्योंकि थानों में अवैध हिरासत, शिकायत लेकर आने वालों को टरकाने, आरोपियों को कई-कई दिन बाद जेल भेजने जैसे गैर कानूनी कार्यों की पोल पलभर में खुल जाएगी। डीजीपी भी इस आदेश को प्रदेश की पुलिस के लिए बड़ा कदम बता रहे हैं।
सीसीटीवी कैमरों का चोरी और लूट से लेकर संगीन अपराधों के खुलासे में बड़ा योगदान रहा है। हर घटना के बाद पुलिस की पहली कार्रवाई आसपास के कैमरे का फुटेज खंगालने की होती है, ताकि अपराधी की पहचान कराई जा सके। यह ऐसा सबूत है जो केस खोलने में पुलिस की राह आसान कर देता है।
अब यही हथियार इमानदारी से अपना कार्य नहीं करने वाले पुलिस वालों के लिए मुसीबत का सबब बनने वाला है। नैनीताल हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस थानों और चेक पोस्टों पर सीसीटीवी कैमरे के साथ बायोमैट्रिक मशीनें लगाने के आदेश दिए हैं। यह भी कहा है कि इन कैमरों की एक फुटेज को एक साल तक सुरक्षित रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे देखा जा सके।
कैमरे लगने से पुलिस के तमाम फर्जीवाड़ों की पोल भी खुलने वाली है। तीसरी आंख के सामने पुलिस झूठ नहीं बोल पाएगी। अपराध का शिकार होने वाले लोगों की रिपोर्ट दर्ज कराने में पुलिस ज्यादा टाल-मटोल नहीं कर पाएगी। अवैध हिरासत में रखने का खेल किसी से छिपा नहीं है।
कैमरे लगने की स्थिति में किसी को अवैध रुप से रखा गया तो पुलिस के खिलाफ यह फुटेज अकाट्य साक्ष्य साबित होगा। दूसरा विपरीत परिस्थिति में पुलिस कर्मी लोकेशन में ज्यादा खेल नहीं कर पाएगी।
कैमरे लग जाएंगे, ठीक हो जाएगा
पुलिस थानों में कैमरे लग जाएंगे, तो काफी हद तक स्थितियां सुधर जाएंगी। पुलिस के गलत व्यवहार से लेकर एफआईआर दर्ज नहीं करने की शिकायतों में भी कमी आएगी। हाईकोर्ट के इस आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। इसके लिए शासन से थानों और चौकियों के लिए सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक