-पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- स्कूल को सीनियर सेकेंडरी से डाउनग्रेड करके सेकेंडरी किया जा सकता है।
-कुछ सेक्शन पर रोक लगाई जा सकती है।
-दो साल के लिए छात्रों के बोर्ड एग्जाम देने पर रोक लग सकती है।
-एक निश्चित समयावधि के लिए स्कूल की मान्यता को सस्पेंड किया जा सकता है।
-स्कूल के पांच साल तक मान्यता का आवेदन करने पर रोक लगाई जा सकती है।
-कुछ विशेष विषयों की मान्यता खत्म की जा सकती है।
-स्कूल की पूरी मान्यता भी खत्म की जा सकती है।
-बोर्ड अपने हिसाब से भी कोई जुर्माना लगा सकता है।
-लिखित चेतावनी दी जा सकती है।
पिछले साल कई टीचरों को जारी हुए थे नोटिस
सीबीएसई देहरादून की कॉपियों के मूल्यांकन में पिछले साल भी कई टीचरों की गड़बड़ी पकड़ में आई थीं। इनमें से सरकारी स्कूलों के टीचरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा था जबकि निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। आपको बता दें कि सीबीएसई पिछले कई साल से मूल्यांकन को पूरी तरह से त्रुटिरहित बनाने पर काम कर रहा है।
10वीं और 12वीं बोर्ड एग्जाम की कॉपियां जांचने के लिए सीबीएसई इस बार थ्योरी इवेल्यूएशन ट्रेंड एनालिसिस (ट्रेटा) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करेगा। बोर्ड का मानना है कि इस सॉफ्टवेयर की मदद से मुश्किल सवालों की मार्किंग आसान हो जाएगी।
ट्रेटा सॉफ्टवेयर से कठिन प्रश्नों के उत्तर के अंक देने में मदद ली जाएगी। प्रश्नपत्र की शिकायत के लिए शिकायत सेल भी गठित कर दी है। अगर किसी केंद्र पर छात्रों की ओर से प्रश्नपत्रों को लेकर कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच सेल करेगी।
इस सॉफ्टवेयर का फायदा ये होगा कि छात्र अपनी समझ से जो भी उत्तर लिखेंगे, उस पर अंक मिलेंगे। बोर्ड ने वर्ष 2018 के गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र की दोबारा हुई परीक्षा के मूल्यांकन में इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया था। उसके बाद पिछले साल भी गणित, अर्थशास्त्र, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में इस सॉफ्टवेयर की मदद से अंक दिए गए।
क्या है ट्रेटा सॉफ्टवेयर
थ्योरी इवेल्यूएशन ट्रेंड एनालिसिस (ट्रेटा) सॉफ्टवेयर को हर मूल्यांकन केंद्र पर इस्तेमाल किया जाएगा। जिस उत्तर पुस्तिका में छात्र टेक्स्ट बुक की भाषा नहीं बल्कि अपनी भाषा में उत्तर देंगे, उसमें उत्तर पुस्तिका के औसतन अंक इस सॉफ्टवेयर की मदद से दिए जाएंगे। यानी अगर किसी छात्र ने किसी प्रश्न का उत्तर अपनी समझ के अनुसार दिया तो ऐसे जितने भी उत्तर रहेंगे, उसके लिए एक औसत अंक निर्धारित होंगे। वे अंक इस सॉफ्टवेयर की मदद से दिए जाएंगे। अपनी भाषा और समझ के साथ कॉपी में उत्तर लिखने का क्या फर्क पड़ा है, इसकी जानकारी भी सीबीएसई की ओर से दी जाएगी।