एक मूल्यांकन केंद्र पर सामने आई एक उत्तर पुस्तिका में छात्र ने अपना मोबाइल नंबर लिखा है। साथ में लिखा है कि 'शिक्षा मंत्री को कहो कि मुझे फोन करे। मैं 18 साल का हूं, देश बदलना जानता हूं'। एक अन्य कॉपी में एक छात्र ने सवाल के जवाब में लिखा है कि 'मैं पास हो गया तो आपको दुआ मिलेगी, अगर नहीं हुआ तो बद्दुआ मिलेगी'।
ऐसे तमाम जवाब पढ़कर मूल्यांकन करने वाले शिक्षक भी परेशान हैं। उधर, सीबीएसई ने साफ कर दिया है कि जो भी छात्र विषय और सवाल से हटकर इस तरह की ऊटपटांग बातें उत्तर पुस्तिका में लिखेगा, उसकी कॉपी सीधे यूएफएम में सील कर दी जाएगी। यानी ऐसे छात्रों का मामला नकल के तहत माना जाएगा। उसी नियम के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
अन फेयर मीन्स के मामले की शिकायत पहले बोर्ड को जाती है। बोर्ड की ओर से एक समिति इसकी सुनवाई करती है। छात्र को भी व्यक्तिगत तौर पर अपना पक्ष बताने के लिए बुलाया जाता है।
अगर बोर्ड उस छात्र के पक्ष से सहमत नहीं होता है तो उस छात्र का रिजल्ट रोक दिया जाता है। उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। उस पर लगे इस प्रतिबंध के बारे में सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य बोर्डों को भी जानकारी भेजी जाती है।
वहीं उत्तराखंड सरकार से अनुबंधित प्रकाशक बाजार में सस्ती एनसीईआरटी किताबें उतारेंगे। सरकार ने एनसीईआरटी किताबों के प्रकाशन के लिए इन प्रकाशकों से अनुबंध किया है। अगले कुछ दिनों में यह किताबें बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी। राज्य सरकार ने उत्तराखंड बोर्ड और सीबीएसई के सभी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से लागू करने की व्यवस्था की है।
इसके लिए शिक्षा विभाग ने टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कुछ प्रकाशकों का चयन किया है, जो एनसीईआरटी पुस्तकों का प्रकाशन करेंगे। इसके अलावा कई निजी प्रकाशक भी एनसीईआरटी की पुस्तकों का प्रकाशन कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की शर्तों के मुताबिक अनुबंधित प्रकाशक अन्य निजी प्रकाशकों की तुलना में कम मूल्य पर किताबें उपलब्ध कराएंगे। शिक्षा सचिव डा. आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि अगले कुछ दिनों में किताबें बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाएगी। विभाग ने इस वर्ष पुस्तकों के प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया समय से निपटा ली थी। साथ ही सीडी तैयार कर प्रकाशकों को उपलब्ध करा दी गई है।
निजी स्कूलों का करेंगे निरीक्षण
शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रदेशभर में अलग-अलग निजी विद्यालयों का निरीक्षण कर, वहां एनसीईआरटी पुस्तकों की व्यवस्था जांचेंगे। कोर्ट ने निजी विद्यालयों को कुछ रेफरेंस बुक्स लगाने की छूट दी है, लेकिन साथ ही शर्त भी लगाई है कि उनकी कीमत एनसीईआरटी किताबों के बराबर ही होनी चाहिए। सचिव शिक्षा डा. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि जिन विद्यालयों की शिकायत आएगी, उनके अलावा अन्य विद्यालयों का भी निरीक्षण किया जाएगा।