सीबीआई को देहरादून कैंट बोर्ड के सभासद कमल राज की इससे पहले भी कई शिकायतें मिली हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर सीबीआई उसे करीब एक साल से ट्रैक कर रही थी। अब चूंकि साक्ष्य मिले तो कमल समेत चार लोगों के खिलाफ सीबीआई ने मुकदमा दर्ज कर लिया। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने इनमें से दो आरोपियों से लंबी पूछताछ की है, जिसमें उन्होंने कई और नाम बताए हैं।
बता दें कि नौ अक्तूबर को सीबीआई ने रिश्वत लेने की सूचना पर कैंट बोर्ड के सभासद कमल राज समेत चार लोगों को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया था। हालांकि, सूचना लीक हो जाने के कारण यह ट्रैप सफल नहीं हो पाया। बताया गया कि इस कार्रवाई के बाद सीबीआई सभासद कमल राज और कैंट बोर्ड के जेसीबी चालक रईस अहमद को पूछताछ के लिए साथ ले गई थी। सूत्रों के अनुसार यहां उनसे लंबी पूछताछ कर दोनों को छोड़ दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने कमल राज, रईस अहमद, कैंट बोर्ड कर्मचारी विजय कुमार और रिश्वत देने की कोशिश करने वाले डॉ. सतीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
सीबीआई के अनुसार केहरी गांव में डॉ. सतीश के क्लीनिक का निर्माण चल रहा था। चूंकि यह निर्माण अवैध था तो कैंट बोर्ड ने इसके ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए। इस बीच डॉ. सतीश की मुलाकात सभासद कमल राज से हुई तो उसने मामले में समझौता कराने की बात कही। सभासद ने जेसीबी चालक रईस के साथ मिलकर सतीश से कहा कि इसके लिए 1.5 लाख रुपये लेंगे और कैंट बोर्ड के सीईओ से कहकर निर्माण की क्लियरेंस दिला देंगे। पैसा कमल राज के घर पर ही लिया जाना था। सीबीआई पहले से ही कमल राज के पीछे थी, लिहाजा सूचना मिलते ही चारों को ट्रैप करने के लिए टीम कमल राज के घर पहुंची। लेकिन, डॉ सतीश व विजय कुमार भाग निकले, जबकि कमल राज व रईस सीबीआई टीम के हत्थे चढ़ गए। हालांकि, जरूरी पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया।
भ्रष्टाचार पर जारी किया पब्लिक नोटिस
रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद कैंट बोर्ड की ओर से भ्रष्टाचार पर पब्लिक नोटिस जारी किया गया है। कैंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जाकिर हुसैन ने रिश्वत मांगने से संबंधित मामले की शिकायत के लिए टेलीफोन नंबर जारी किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कैंट क्षेत्र में इसके पर्चे भी चस्पा कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी रिश्वत की बात करता है तो उसकी सीधी शिकायत उनके कार्यालय में की जा सकती है।