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उत्तराखंड: वन्यजीवों की मौत के मामले की जांच को पहुंची सीबीआई, दस्तावेज खंगाल रहे अधिकारी

Wed, 03 Oct 2018 08:09 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
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- फोटो : अमरउजाला
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बाघों और तेंदुओं की मौत की जांच के लिए दिल्ली से सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने डेरा डाल दिया है। सीबीआई टीम ने हल्द्वानी वन प्रभाग में जाकर बाघ और तेंदुए की मौत के लिए दस्तावेज खंगाले है। 

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हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका में सुनवाई के बाद उत्तराखंड में पांच सालों में बाघ और तेंदुओं की मौत की सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे। सीबीआई 2012-2017 तक बाघ, तेंदुए की मौत का जांच करेगी। सोमवार को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन दिल्ली से एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम हल्द्वानी पहुंची।

बताया जा रहा है कि सीबीआई टीम कुमाऊं में जिम कार्बेट नेशनल पार्क, नंधौर वन्य जीव अभयारण्य समेत अन्य प्रभागों में बाघ, तेंदुए की मौत की जांच करेगी। टीम ने सोमवार को हल्द्वानी और तराई पूर्वी वन प्रभाग के दफ्तर पहुंचकर जानकारी जुटाई है। इसके बाद टीम ने हल्द्वानी वन प्रभाग में वन्य जीवों से मौत संबंधी दस्तावेजों को खंगाला।

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जांच से जुडे़ मामलों की मांगी जानकारी

सीबीआई टीम ने बाघ, तेंदुओं की मौत के मामले में जांच के सिलसिले में देहरादून वन मुख्यालय से कई बिंदुओं पर जानकारी तलब की थी। इसमें पांच सालों में बाघों की मौत और तेंदुओं का रिकार्ड मांगा गया है। इसके अलावा संदिग्ध/शिकार मामलों की वन विभाग जांच कर रहा है, उसके बारे में भी सीबीआई ने अभिलेख जुटाएं हैं। वन मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार सीबीआई ने कुछ जानकारी एक प्रोफार्मा पर मांगी थी, जिसे उपलब्ध करा दिया गया है।

कई मामलों में वनाधिकारियों की भूमिका सवालों में
नों में वन्यजीवों की मौत के मामलों में वनाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पांच साल पहले तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अधीन लामाचौड़ क्षेत्र में आम्रपाली इंस्टीट्यूट के पीछे एक तेंदुआ का शव मिल था। तेंदुआ के गले में तार का फंदा लगा हुआ था। संबंधित मामले में शिकार का मुकदमा दर्ज हुआ था, पर कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

इसी तरह तराई पश्चिमी वन प्रभाग में ज्वाला वन क्षेत्र में बाघ का शिकार हुआ था। बताया जाता है कि उसमें बाघ के शिकारियों को नहीं पकड़ा जा सका। कार्बेट पार्क के कई मामलों को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था ने मामले को जोरशोर से उठाया था। इसमें अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
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