भारतीय सैन्य अकादमी में दो बरस पहले हुई ग्रुप सी और डी श्रेणी की 283 पदों पर भर्तियों में अनियमितता पाते हुए सीबीआई ने तीन लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के सैन्य अधिकारियों सहित दो दर्जन अन्य के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किये हैं।
जांच एजेंसी के हाथ कई अहम दस्तावेज लगे हैं, जिससे आईएमए की सिविल भर्ती की चयन प्रक्रिया कटघरे में आ गई है। सीबीआई ने साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज सहित कई अन्य धाराओं में दोनों मुकदमे दर्ज किये हैं, जिसके तहत कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी जल्द संभव है।
फर्जी सर्टिफिकेट पर भर्तियां
आईएमए में जाली सर्टिफिकेट पर बड़े पैमाने पर ग्रुप सी और डी में भर्तियां हुई हैं। लगभग 6 माह से सीबीआई ने मामले में प्रारंभिक जांच करने के बाद दो दिन पहले मुकदमा दर्ज कर लिया। सीबीआई ने जांच में 283 पदों पर दो बार हुई भर्तियों की जांच की है।
इन भर्तियों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरियां देने का मामला है। सीबीआई की दबिश के बाद अकादमी ने चयनित सिविल कर्मचारियों के भर्ती के समय संलग्न शैक्षणिक, अनुभव आदि दस्तावेजों की जांच करवाई।
36 कर्मचारी हो चुके हैं बर्खास्त
कई कर्मचारियों के दस्तावेज फर्जी मिलने पर अकादमी की प्रशासनिक शाखा अब तक 36 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर चुकी है। सीबीआई ने आईपीसी की 120 बी, 420, 467, 468, 471 धारा के तहत तीन सैन्य अधिकारियों सहित 30 अभ्यर्थियों और अन्य कई पर मुकदमा दर्ज किया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पूरे प्रकरण में जांच में कम से कम पांच से छह माह का समय लगेगा, जिसके बाद सीबीआई चार्जशीट दाखिल करेगी। इस दौरान नामजद अधिकारियों और अन्य से पूछताछ के अलावा गिरफ्तारी भी संभव है।
यह भी जांच के अहम पहलू
- नामजद अधिकारियों के अलावा वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर नजर- फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने में सेना की मिलीभगत- भर्तियों के लिए पैसे का लेन देन का बिंदु अहम- इससे पहले हुई भर्तियों में अभ्यर्थियों के दस्तावेज जांच- फर्जी एजूकेशन सर्टिफिकेट कैसे हुए तैयार- आईएमए चयन बोर्ड की प्रवेश प्रक्रिया में भूमिका