राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत वर्ष 2008-09 में दवाओं की खरीद की सीबीआई जांच करेगी। सीएम हरीश रावत ने मामले में सीबीआई जांच करवाने के आदेश दिये हैं।
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सूचना आयोग ने 31 दिसंबर 2013 में मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश शासन से की थी, जिसके चार माह बाद सरकार ने चुनावों के बीच यह फैसला लिया।
भाजपा शासनकाल का है मामला
रिप्रोडेक्टिव चाइल्ड केयर (आरसीएच) के तहत वर्ष 2008-09 में 14.7 करोड़ रुपये का बजट मिशन के तहत स्वीकृत हुआ, जिसमें लगभग साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये की खरीद हुई।
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खरीदी गई दवाएं सभी जनपदों में बांटी जानी थी, लेकिन 2008 में रुड़की ड्रग वेयर हाउस में 22 लाख रुपये की एक्सपायर्ड दवाओं की खेप मिली।
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मामले का खुलासा होने के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसपर जांच बैठाकर तुरंत स्टोर इंजार्च को निलंबित कर लीपापोती की।
राष्ट्रीय सूचना अधिकार जागृति मिशन के अनिल शर्मा ने एक्सपायर दवा को लेकर पहले लोकायुक्त में लड़ाई लड़ी फिर सूचना आयोग तक जानकारियां नहीं मिलने का मामला लेकर गए।
चार माह तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही सिफारिश
विभागीय स्तर पर एक बार मामले की जांच हो चुकी है, जबकि एक जांच अपर सचिव वित्त एलएम पंत कर चुके हैं। 2012 में लोकायुक्त के आदेश पर एनआरएचएम मिशन निदेशक और अपर सचिव स्वास्थ्य पीयूष सिंह की जांच रिपोर्ट में दोषियों को चिन्हित किया गया है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
आयुक्त अनिल शर्मा ने 31 दिसंबर को मामले में अब तक हुई कार्यवाही को लेकर जानकारी मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब विभाग नहीं दे पाया। आयुक्त अनिल शर्मा ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए मामले की जांच सीबीआई से करवाने की सिफारिश की।
आयुक्त की रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने आयोग की सिफारिश को सरकार के पास भेजा, लेकिन चार माह तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। इसके बाद विजिलेंस जांच की बात चलती रही। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश सीएम वे सीबीआई जांच के संस्तुति दे दी है। आदेश गृहविभाग को भेज दिये हैं, जिसपर वहां से अधिसूचना जारी होगी।
सूचना आयुक्त की जान को खतरा
सीबीआई की जांच इस मामले में होनी ही चाहिए थी। मैने दो साल पहले इस मामले में जांच के लिए कहा था। पहली नजर में ही दवा घोटाले में करीब 14.80 करोड़ का मामला सामने आया था।
सीबीआई इस मामले की जांच करेगी तो यह मामला कई करोड़ रुपये का खुलकर सामने आएगा। हाल यह रहा कि मुझे इस मामले की सुनवाई के दौरान दो बार जान से मारने की धमकी मिली। अभी हाल ही में फिर धमकी देकर डराने की कोशिश की गई।
यह मामला इतना संवेदनशील है कि मुझे प्रदेश सरकार से पर्याप्त सुरक्षा के लिए कहना पड़ा। अब प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है तो सारी परतें खुल कर सामने आ जाएंगी।
-अनिल शर्मा, राज्य सूचना आयुक्त