अधिवक्ता सतीश गर्ग ने बताया कि इस मुकदमे में सीबीआई ने दो माह बाद ही चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ तो सीबीआई ने कुल 16 गवाह पेश किए। जबकि, मीणा की ओर से अपने बचाव में एक भी गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। ऐसे में अदालत ने इन गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर मीणा को रिश्वत लेने का दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान कर दिया।
पहला केस जिसमें नहीं रंगे गए नोट
देहरादून एंटी करप्शन ब्रांच सीबीआई का यह पहला केस था जिसमें कोई नोट फिनेफ्थेलीन में नहीं रंगा गया। यह केस टेक्नोलॉजी के आधार पर ही दर्ज हुआ। इसमें शिकायतकर्ता और रिश्वत लेने वाला पांच अप्रैल 2019 से पहले कभी नहीं मिले थे। खाते को भी सीबीआई ने कई बार वेरिफाई कराया और फिर सभी रिकॉर्डिंग आदि को जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया था।
एक्ट में संशोधन के बाद पहला केस
दरअसल, इस मुकदमे में 16 जून 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई। इसी दिन प्रिवेंसन ऑफ करेप्शन एक्ट में संशोधन हुआ कि सभी नए केसों का दो साल के भीतर निपटारा किया जाना है। लिहाजा, अदालत ने इस केस को पहला केस माना और सीबीआई ने इसे चार माह में डिसाइड कर दिया।