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गुटखा-पान के चक्कर में जंगलों पर आई आफत

Fri, 27 May 2016 03:15 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, हल्द्वानी

सार

  • बड़े तस्कर पर खैर की तस्करी, कटान शुरू 
  • 10 लाख तक की खैर पकड़ी जा चुकी
  • बाहर से आने वाले कृत्रिम कत्था की सप्लाई 
  • बंद होने को मुख्य कारण मान रहे वनाधिकारी 
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जंगलों से हो रही तस्करी - फोटो : Demo pic
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विस्तार
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गुटखा-पान उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित खैर के जंगल का दुश्मन बन गया है। गुटखा, पान में कत्था इस्तेमाल होता है, इसके लिए खैर के पेड़ों पर जमकर आरी चल रही है। तस्करों के निशाने पर तराई में खैर का जंगल बना हुआ है। चार महीने के अंदर ही करीब 10 लाख की खैर की लकड़ी बरामद की गई है।
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वनाधिकारियों के अनुसार अभी तक गुटखा, पान के लिए खैर की आपूर्ति बाहर के मुल्कों से आने वाले गैंबियर(कृत्रिम कत्था) से हो रही थी। ऐसे में उपलब्धता बनी हुई थी, पर अब बताया जा रहा है कि आपूर्ति में कोई व्यवधान आया है। पर डिमांड बनी हुई है, ऐसे में खैर के जंगलों पर तस्करों की निगाह लग गई है।

तीन से चार महीने में खैर के तस्करों ने वन महकमे की नींद उड़ा रखी है। चार से पांच ट्रक खैर के गिल्टे बरामद हो चुके हैं। इनकी कीमत करीब दस लाख तक है। यह वह लकड़ी है, जो कि बरामद हुई है। आशंका है कि इससे बड़ी मात्रा में लकड़ी तस्करी के जरिए दूसरी जगहों पर पहुंच चुकी होगी।
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तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ सनातन कहते हैं कि सालों से खैर की लकड़ी के तस्करी के मामले न के बराबर आ रहे थे। सागौन, शीशम के तस्कर ही सक्रिय थे। पर अब कुछ महीनों से खैर की तस्करी बड़े पैमाने पर बढ़ी है।

टीमें लगातार छापमार कार्रवाई कर रही है। जो पता चला है कि उसके अनुसार खैर की डिमांड कानपुर, नोएडा आदि जगहों पर खूब है। यहां तस्करी कर माल इन जगहों पर ले जाया जा रहा है।
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साइकिल, बाइक से लेकर ट्रक तक का इस्तेमाल

अपराध - फोटो : desk
खैर तस्करी में साइकिल, बाइक से लेकर ट्रक तक का इस्तेमाल हो रहा है। जलावन लकड़ी की आड़ में खैर के छोटे टुकड़ों को छिपा लिया जाता है। फिर जब गिल्टे कई हो जाते हैं, तो उनको बड़े तस्कर को सौंप दिया जाता है। इसी तरह बाइक पर एक साथ कई गिल्टे लादकर तस्करी हो रही है। लकड़ी के साथ जंगलात ट्रक, पिकप से लेकर बाइक तक वन विभाग सीज कर चुका है।

झोपड़ी की बीम बनाने में इस्तेमाल
करीब छह महीने तक खैर की लकड़ी की कोई डिमांड नहीं थी। जंगल में अंदर रहने वाले खत्तावासी झोपड़ी बनाने में खैर की लकड़ी (मजबूती) इस्तेमाल करते थे, पर अब खैर की लकड़ी के अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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