नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस की धारणा बजट में पूरी तरह समाहित नजर आई। तमाम ऐसे फैसले किए गए हैं, जिससे नकदी का प्रचलन घटे और लोग इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन की ओर बढ़ें। न केवल आयकर की दृष्टि से बल्कि आम लेनदेन में भी कैश ट्रांजेक्शन पर नकेल कसी गई है।
फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट (एफआईयू) की सलाह पर वित्त मंत्री ने तीन लाख से अधिक नकद राशि से कोई भी भुगतान या वस्तु की खरीद पर रोक लगा दी है। ऐसे में तीन लाख से अधिक मूल्य की खरीददारी केवल चेक या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ही होगी।
इसके बाद भी यदि कोई व्यक्ति इस नियम से खिलवाड़ करता है तो तीन लाख से अधिक राशि की खरीदारी पर उसे सौ फीसदी पैनाल्टी देनी होगी। यानी उतनी ही राशि आयकर विभाग वसूलेगा, जितने का नकद लेनदेन हुआ है। इसी तरह आयकर अधिनियम की धारा 44-एडी में यह व्यवस्था है कि यदि कोई व्यक्ति अपना सालाना टर्नओवर एक करोड़ दिखाकर उस पर आठ फीसदी मुनाफे की घोषणा के साथ टैक्स देता है तो उसे अपनी लेखा-बहियों का सीए से ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है।
इस नियम में संशोधन करते हुए टर्नओवर की सीमा को दो करोड़ कर दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि संबंधित फर्म में जितना भी टर्नओवर इलेक्ट्रॉनिक यानी ऑनलाइन सेल होगी, उसमें छह फीसदी के हिसाब से ही मुनाफा जोड़ा जाएगा। इससे भी कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलना तय है।
एक अन्य फैसले में वित्त मंत्री ने खर्चों के नकद भुगतान की सीमा को बीस हजार से घटाकर दस हजार कर दिया है। अधिक से अधिक व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में प्वाइंट ऑफ सेल मशीनें लगाएं, इसके लिए इन मशीनों के निर्माण से उत्पाद शुल्क की छूट दी गई है। इससे ये मशीनें अब कम दामों में उपलब्ध होंगी। कुछ यही व्यवस्था एटीएम समेत अन्य नकद निकासी के साधनों पर भी की गई है।