पांच साल पहले उत्तराखंड विधानसभा कूच के दौरान तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और मौजूदा कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पर अदालत ने रोक लगा दी है।
पुलिसकर्मियों से गालीगलौच और धक्कामुक्की की थी
21 दिसंबर 2009 को तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत और अन्य कांग्रेसियों ने भाजपा सरकार के खिलाफ विधानसभा कूच किया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बेरिकेडिंग तोड़कर पुलिसकर्मियों से गालीगलौच और धक्कामुक्की की थी।
बेरिकेडिंग पर तैनात इंस्पेक्टर चंदन सिंह बिष्ट ने नेहरू कॉलोनी थाने में हरक सिंह रावत और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। रावत और अन्य कार्यकर्ताओं पर बलवा, पुलिसकर्मियों से अभद्रता, गाली गलौच, सरकारी कार्य में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आदि आरोप हैं।
बाद में कांग्रेस सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने का शासनादेश जारी किया था। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई चल रही थी।
अदालत ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि मुकदमा वापस लेने के पीछे जनहित क्या है? जनहित साबित न होने पर अदालत ने मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया है।