उत्तराखंड परिवहन विभाग की कार्रवाई को खुद उसके ही अधिकारियों ने ही ‘चैलेंज’ कर दिया है। पहले जिस वाहन शोरूम के खिलाफ धांधली का आरोप लगाते हुए उनको वाहन बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। उसके दो दिन बाद ही विभाग के अधिकारियों ने अपनी ही कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निलंबन को हटा दिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि पहले ‘किस’ के इशारों पर कार्रवाई की गई और जब कार्रवाई हो गई तो ‘किस’ के इशारों पर अधिकारियों ने अपने ही कदम को गलत ठहरा दिया।
शोरूम में छापे मारे
गत 26 अक्टूबर को सहायक परिवहन संभागीय अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी के नेतृत्व में आरटीओ टीम ने भगत फोर्ड, फॉक्सवेगन, केटीएम और प्रीमियर मोटर्स के शोरूम में छापे मारे थे।
टीम ने प्रीमियर मोटर्स को छोड़ भगत फोर्ड और फॉक्सवेगन के शोरूम पर एक हफ्ते के लिए वाहन विक्रय करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। टीम का दावा था कि भगत फोर्ड और फॉक्सवेगन के फार्म-19 और ट्रेड सर्टिफिकेट में गंभीर खामिया है।
कार्रवाई मंत्री के इशारों पर
वहीं केटीएम शोरूम (बजाज) से छापेमारी के दौरान ही स्पष्टीकरण मांगा गया और उसे राहत दे दी गई। सूत्रों के अनुसार, पूरी कार्रवाई एक काबिना मंत्री के इशारों पर की गई थी। सूत्रों का यह भी कहना था कि मंत्री ने केवल एक शोरूम पर नजरें टेढ़ी करने को कहा था। लेकिन मीडिया में बात लीक होने पर मजबूरन अन्य शोरूमों भी कार्रवाई की गई।
एक हफ्ते में स्पष्टीकरण
लेकिन, सोमवार को नाटकीय अंदाज में भगत फोर्ड और फॉक्सवेगन के शोरूम से निलंबन हटा दिया गया। तर्क दिया गया कि त्योहारी सीजन में बिना स्पष्टीकरण मांगे ही निलंबन करना गलत कार्रवाई है। आरटीओ दिनेश चंद्र पठोई बताते हैं कि निलंबन नहीं किया जाना चाहिए था। इसलिए दोनों शोरूम से निलंबन हटा दिया गया है। वह एक हफ्ते में स्पष्टीकरण देंगे। उसके बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।