खराब मौसम के कारण सोमवार को वायु सेना के हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके। इसके चलते कैलाश मानसरोवर यात्रियों का 15वां दल पिथौरागढ़ से गुंजी रवाना नहीं हो सका। उधर 11वें दल के 60 और 12वें दल के 16 सदस्य गुंजी में ही फंसे रहे।
कोसी में फंसी गायों को सुरक्षित निकाला
भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित कोसी नदी में फंसी तीनों गाय को 48 घंटे बाद सोमवार सुबह 11:30 बजे एनडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीम ने सुरक्षित निकाल लिया है। एनडीआरएफ की टीम ने पत्थरों पर रस्सी बांधकर एक-एक कर तीनों गायों बाहर निकाल लिया। सोमवार को इस रेस्क्यू अभियान में तीन घंटे लगे। जानवरों के मालिक को रविवार की देर रात ही बचा लिया गया था।
बागेश्वर-अल्मोड़ा में मकानों पर शामत
बागेश्वर जिले में सोमवार को कई मकान ध्वस्त हो गए। इनमें तीन मकान जौलगांव, उडेरा और कठायतबाड़ा में जबकि दो बैड़ा मजेड़ में और एक मकान ओखलधार में ध्वस्त हुआ है। सिमखेत गांव में गोशाला ध्वस्त हो गई। हरकोट गांव में बज्रपात से दुधारू गाय की मौत हो गई। उधर, गरुड़ तहसील के द्यौनाई गांव में कुंदन सिंह का मकान पूर्ण क्षतिग्रस्त हो गया। वज्यूला, धपोलासेरा और बोहाला में तीन मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, बड़ेत के खारबगड़ तोक में 12 और परिवार बेघर हो गए हैं। खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों ने अपने घर छोड़ कर संबंधियों के यहां शरण ली है। सोमेश्वर तहसील के पडोलिया गांव में भी एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। उनके परिवार ने पड़ोसी के यहां शरण ली है। वहीं जालधौलाड़ (बिरलवा) गांव में एक घर की दीवार टूट गई। रानीखेत तहसील में कई भवनों के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। कई जगह संपर्क मार्ग और सड़कों को भी नुकसान हुआ है। तिपौला क्षेत्र में भारी भरकम पेड़ गिरने के कारण विद्युत लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे आपूर्ति कई घंटों तक ठप रही। सल्ट तहसील के मल्ली पोखरी, झड़गांव, उजलकना में दो मंजिले तीन मकान और भौनाडांडा के तोक छलाण में एक मंजिला मकान ध्वस्त हो गया है। धानाचूली में एक मकान की दीवार गिर गई।
पीपल कोटी में भी हो रहा लगातार भूस्खलन
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बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में सोमवार को चौथे दिन भी वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाई है। हाईवे बंद होने पर लामबगड़ से 153 तीर्थयात्री पैदल चलकर बदरीनाथ धाम पहुंचे, जबकि 77 तीर्थयात्री बदरीनाथ के दर्शन कर गंतव्य को लौटे।
वहीं बदरीनाथ हाईवे के भूस्खलन क्षेत्र क्षेत्रपाल में रुक-रुककर चट्टान से भूस्खलन हो रहा है, जिससे यहां एक-एक कर वाहनों की आवाजाही करवाई जा रही है। हाईवे के दोनों छोर पर पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है लेकिन पुलिस की रोक के बावजूद ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल ही भूस्खलन क्षेत्र को पार कर रहे हैं। सोमवार को बारिश थमने के कारण एनएचआईडीसी की ओर से हिल साइड अटके मलबे को भी हटाना शुरू कर दिया है। उपजिलाधिकारी परमानंद राम ने बताया कि मौसम सामान्य होने पर क्षेत्रपाल में हिल साइड जमा मलबे को साफ कर दिया जाएगा। जल्द ही हाईवे को सुचारु कर दिया जाएगा।
एक बार में एक वाहन ही पुल से गुजरे
दूसरी ओर बदरीनाथ हाईवे पर बिरही पुल के नीचे वीर गंगा से हो रहे कटान से पुल खतरे की जद में है। डीएम स्वाति एस भदौरिया ने पुलिस प्रशासन को पुल से एक बार में एक ही वाहन की आवाजाही करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने लिए पुल के दोनों छोर पर साइन बोर्ड स्थापित करने को कहा।
कोटद्वार में नदियां उफान पर
कोटद्वार में दो दिन से हो रही भारी बारिश से नदियां उफान पर हैं। यहां कई क्षेत्रों में जलभराव हो गया है। मालन, खोह, सुखरो और तेलीस्रोत के तटवर्ती इलाकों में जबरदस्त भू-कटाव होने की सूचना है। आबादी में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां के लोगों ने रविवार की रात दहशत में गुजारी। कोटद्वार-पौड़ी हाईवे दुगड्डा के पास बाधित है। पौड़ी हाईवे पर भी आवाजाही ठप। लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है।
नदी में बहे खच्चर को बचाया
उत्तरकाशी जिले के बड़कोट में हनुमानचट्टी के निकट यमुना नदी में बहे एक खच्चर को एसडीआरएफ व पुलिस के जवानों ने ग्रामीणों की मदद से बचा लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब दस बजे निषणी गांव निवासी राजेंद्र सिंह का खच्चर यमुना नदी पार कर रहा था। लेकिन बहाव अधिक होने के कारण वह नदी में बह गया। इस बीच घटना की सूचना मिलने पर चौकी प्रभारी बलवीर रावत के नेतृत्व में पुलिस व एसडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर रेस्क्यू अभियान चलाया और करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद खच्चर को सुरक्षित बचा लिया। बड़कोट से दिनेश रावत।