चकराता। हसीन पहाड़ियों की वादियों के दीदार को चकराता रूख करने वाले लोगों को अब इस ब्यूटी के दीदार के लिए टैक्स के रूप में हैवी ड्यूटी चुकानी होगी। छावनी परिषद ने टोल टैक्स की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक का इजाफा कर दिया है। वहीं क्षेत्रीय लोगों ने इस मनमाने टैक्स का विरोध करना शुरू कर दिया है।
पूर्व में छावनी परिषद की ओर से व्यवसायिक वाहनों से टोल टैक्स के रूप में 10 रुपये लिए जाते थे जबकि, लोड भारी वाहनों से 60 रुपये प्रतिदिन की दर से लिए जाते थे। लेकिन अब व्यवसायिक छोटे वाहनों से 110 रुपये और ट्रकों से 150 रुपये टोल टैक्स के रूप में वसूले जा रहे हैं। इसके साथ ही पूर्व में निजी पर्यटक वाहनों की एंट्री पर 30 रुपये प्रतिदिन शुल्क के रूप में वसूले जाते थे लेकिन, अब छावनी परिषद ने निजी चौपहियां वाहन से 100 रुपये और दोपहिया वाहन चालकों से 50 रुपये एंट्री के रूप में वसूलने शुरू कर दिए हैं जबकि, पूर्व में दोपहिया वाहनों की एंट्री निशुल्क थी।
इसके साथ ही स्थानीय लोगों से भी छावनी परिषद ने पार्किंग शुल्क के रूप में दस रुपये और दुपहिया वाहनों से चार रुपये प्रतिदिन की दर से वसूलना शुरू कर दिया है। जिसका क्षेत्रीय लोगों ने विरोध किया है। व्यापार मंडल अध्यक्ष विवेक अग्रवाल, राजेंद्र राणा, प्रदीप, अंकित, सुनील जैन, पंकज जैन, तीर्थ कुकरेजा, राजकुमार मेहता, राजेश्वर आदि का कहना है कि परिषद ने टैक्स के रूप में मनमाना रेट बढ़ाया है। स्थानीय लोग भी यदि पार्किंग शुल्क देंगे तो उनके लिए वाहन रखना मुश्किल हो जाएगा। पर्यटक भी क्षेत्र में आना छोड़ देंगे। बढ़ी हुई दर वापस नहीं होने पर व्यापार मंडल ने आंदोलन की चेतावनी दी है। मालूम हो कि बीते साल भी छावनी परिषद ने टोल टैक्स वसूली को प्राइवेट हाथों में सौंप दिया था। बाद में लोगों के विरोध के बाद छावनी परिषद को निर्णय वापस लेना पड़ा था।