देहरादून। देशभर के 62 कैंट बोर्डों में से 58 कैंट बोर्डों का कार्यकाल सोमवार को समाप्त हो गया। मंगलवार से कैंट बोर्डों को छह माह का नया कार्यकाल शुरू हो जाएगा। बोर्ड को चलाने के लिए अब दोबारा उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। उपाध्यक्ष के लिए सभी कैंटों में एक बार फिर जोड़-तोड़ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राजनीतिक पार्टियों के साथ ही अपने स्तर पर भी प्रत्याशी सभासदों को अपने पक्ष में लाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
देश में कुल 62 क ैंट बोर्ड हैं। इनमें से 58 कैंट बोर्डों का चुनाव जनवरी 2015 में हुआ था। 10 फरवरी 2015 को बोर्डों के पांच साल के कार्यकाल का गजट नोटिफिकेशन हुआ था। शेष चार कैंट बोर्डों को चुनाव जुलाई 2015 में हुआ था। इसलिए उनका कार्यकाल अगस्त 2020 तक है। 58 कैंट बोर्डो का कार्यकाल सोमवार को खत्म हो चुका है। रक्षा मंत्रालय ने इन सभी कैंट बोर्डों को छह माह का एक्सटेंशन दिया है। लिहाजा मंगलवार से कैंट बोर्डों का छह माह का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। कार्यकाल पूर्ण होने के उपरांत नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया भी समस्त छावनी परिषदों ने शुरू कर दी है। छावनी परिषदों के द्वारा पूर्व में की गई चुनाव प्रक्रिया को अब पुन: नए सिरे से आगामी होने वाले चुनाव से पूर्व दोबारा किया जाएगा। महिला वार्डों के आरक्षण व अनुसूचित-जाति व जनजाति के सभासदों के लिए दोबारा नई प्रक्रिया के द्वारा चुनाव से पूर्व आरक्षण किया जाएगा।
छह महीने का और हो सकता है एक्सटेंशन
छावनी अधिनियम 2006 में संशोधन के चलते रक्षा मंत्रालय ने कैं ट बोर्डों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार एक और छह माह का कार्यकाल बढ़ना तय है। देखना की बात यह होगी कि रक्षा मंत्रालय छावनी अधिनियम 2006 में संशोधन कितने समय के अंतर्गत कर पाता है। सूत्रों के अनुसार छावनी एक्ट में संशोधन हेतु प्रस्तावों को पहले रक्षा मंत्रालय की कमेटी से स्वीकृत होने के बाद देश के दोनों सदनों लोक सभा एवं राज्य सभा से पास कराकर फि र विधि मंत्रालय से स्वीकृत कराना होगा। इसमें लंबा समय लगने की संभावना हैं। ऐसे में छावनी परिषद केआगामी चुनाव कितने समय बाद होगें यह कहना मुश्किल हैं। क्योंकि वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2007 तक छावनी अधिनियम में संशोधन किए जाने के समय देश के समस्त 62 छावनी परिषद तीन वर्ष तक भंग रहे थे। इसके बाद संशोधन के उपरांत रक्षा मंत्रालय के द्वारा चुनाव 2008 में कराए गए थे।