उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में निर्वाचन अधिकारी की ओर से खर्चों का हिसाब तलब करने पर एक प्रत्याशी इस कदर परेशान हो गया है कि उसने चुनाव लड़ने से ही हाथ खड़े कर दिए। उसका कहना है साहब! इतना हिसाब-किताब मैं नहीं रख सकता, इसलिए मेरा नामांकन वापस कराया जाए।
झबरेड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने की हसरत लिए रुड़की के शिवपुरम निवासी मैनपाल ने बड़े उत्साह से नामांकन दाखिल किया था, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि चुनाव के दौरान किन-किन प्रक्रियाओं और परेशानियों से गुजरना पड़ता है, हालांकि इससे पहले वह ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ चुके हैं।
विधायकी का पहली बार चुनाव लड़ रहे मैनपाल को एक फरवरी को प्रथम चरण के तहत चुनावी खर्च का विवरण देना था, लेकिन दो फरवरी को चाचा की मौत होने पर वह इससे पूरी तरह अंजान रहे। इस पर सहायक निर्वाचन अधिकारी चित्रकुमार त्यागी ने उन्हें चार फरवरी को नोटिस जारी कर खर्च का विवरण तलब किया।
साथ ही आगे भी खर्चों का विवरण रजिस्टर जांच कराने की बात कही। इससे परेशान होकर मैनपाल ने चुनाव लड़ने से ही हाथ खड़े कर दिए। उसका कहना है ‘मैं पहले से ही परेशान हूं। ऐसे में इतना हिसाब किताब और विवरण नहीं उपलब्ध करा सकता’। उसने सहायक निर्वाचन अधिकारी से मदद की गुहार लगाई। उसके बाद रोशनाबाद में आवेदन भी दिया कि ‘साहब! मैं अब चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं’।
मैनपाल की सुनिए
एक फरवरी को चुनावी खर्चों का विवरण देना था, लेकिन दे नहीं पाया। इसके बाद दो फरवरी को चाचा की मौत हो गई, उसके बाद मैं काफी परेशान हो गया। इसी बीच सहायक निर्वाचन अधिकारी की ओर से खर्चों के हिसाब के लिए नोटिस जारी किया, जिसके बाद मैंने आवेदन देकर चुनाव लड़ने में असमर्थता जताई है।
एक अन्य प्रत्याशी भी परेशान
चुनाव लड़ने में एक अन्य प्रत्याशी ने भी असमर्थता जताई है। प्रत्याशी अतर सिंह के बेटे और चाचा ने सोमवार को सहायक निर्वाचन अधिकारी को आपबीती सुनाई। इस पर सहायक निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें दिलासा देकर हर संभव सहायता का भरोसा दिया।