प्रो. साही के अनुसार अब पित्त की थैली आदि में किसी शिकायत को लेकर रोगी आता है तो समय रहते ही उसके जीन की जांच कर यह देखा जा सकेगा कि कहीं उसमें बदलाव तो नहीं हो रहा है। अगर बदलाव के संकेत हैं तो पित्त की थैली को कैंसर उपजने से पहले ही हटा दिया जाएगा। इससे काफी हद तक पहले ही कैंसर को रोकने में मदद मिल सकेगी।
खराब हालत में पहुंचते हैं रोगी
मेडिकल कॉलेज में पित्त की थैली के कैंसर रोगी स्टेज-4 में पहुंचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार पहाड़ पर पित्त की थैली में पथरी, कैंसर काफी देखने को मिलता है। पित्त की थैली में कैंसर अंदर-अंदर बढ़ता रहता है, जिसका आसानी से पता नहीं चलता है। जब तक उसकी जांच, पहचान होती है तब तक मर्ज बेकाबू हो चुका होता है। इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि रोग होने से पहले ही खतरे को भांप लिया जाए।