कैंसर जैसी बीमारी के बावजूद मीना पाल के चेहरे पर मुस्कान है। देखभाल के लिए बीना के साथ उसकी मां भी अस्पताल में हैं। हॉस्पिटल में मीना खाली प्लास्टिक को बोतलों और प्रोटीन पाउडर के डिब्बों से कलात्मक गुलदस्ते बना रही हैं।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के अंतिम स्टेट में चेहरे पर मुस्कान लिए कुछ कर गुजरने की हसरत बिरले लोगों में ही दिखती है। इसी तरह की सख्श हैं मीना पाल। जो कैंसर के आखिरी चरण से जूझ रही हैं, लेकिन खुशमिजाजी उनकी पहचान बन गई है।
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विकासनगर निवासी मीना पाल (40) गुदा कैंसर के अंतिम चरण से जूझ रही हैं। गंगा हॉस्पिस की मुख्य परिचालन अधिकारी पूजा डोगरा ने बताया कि बीते वर्ष दिसंबर माह में मीना पाल को प्रशामक देखभाल के लिए यहां भर्ती किया गया था। बीना को अंतिम स्टेज का गुदा कैंसर हैं। देखभाल के लिए बीना के साथ उसकी मां भी अस्पताल में हैं।
पूजा ने बताया कि मीना पाल काफी कमजोर हो गई हैं, लेकिन उनकी आवाज और स्वभाव में प्रसन्नता बरकरार है। हॉस्पिटल बेड से ही मीना खाली प्लास्टिक को बोतलों और प्रोटीन पाउडर के डिब्बों से कलात्मक गुलदस्ते बना रही हैं।
गंगा प्रेम हॉस्पिस की सोशल वर्कर निहारिका खंडूड़ी ने मीना को ऐक्रेलिक रंग और रिबन लाकर सौंपे और मीना ने अपने हाथों से सुंदर चीजें बनानी शुरू कर दीं। पूजा डोगरा बताती हैं कि अब मीना की सुंदर खिलोने बनाने की योजना है।