उत्तराखंड बोर्ड के रिजल्ट से सरकारी स्कूलों को फिर झटका लगा है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मेरिट सूची में सरस्वती विद्या मंदिर और अशासकीय स्कूलों के बच्चे छाए हुए हैं।
हाईस्कूल में टॉप 25 में 94 छात्र-छात्राओं की सूची में मात्र 10 सरकारी स्कूलों के बच्चे हैं। वहीं, इंटरमीडिएट में 86 में से भी मात्र 13 सरकारी स्कूलों के बच्चे मेरिट में स्थान बना पाए हैं।
प्रदेश के कुल बजट का 25 फीसदी से अधिक हर साल सरकारी स्कूलों पर खर्च हो रहा है। इन स्कूलों के टीचर पूरे साल सुगम और अति सुगम स्कूलों में तबादलों के लिए जोर लगाते हैं।
शिक्षा मंत्री से मुख्यमंत्री तक सिफारिशें चलती हैं, लेकिन स्कूलों का बोर्ड परीक्षा परिणाम निराशाजनक है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की टॉप 25 की मेरिट लिस्ट में केवल सरस्वती विद्या मंदिर और अशासकीय स्कूलों के बच्चों का दबदबा है। 94 छात्रों की लिस्ट में 84 बच्चे अशासकीय स्कूलों के हैं।
इंटरमीडिएट में टॉप 25 की लिस्ट में भी अशासकीय स्कूल के बच्चों का परचम है। मेरिट में प्रदेश भर में केवल 13 सरकारी स्कूलों के छात्र जगह बना पाए हैं। वहीं, अशासकीय स्कूलों के 73 बच्चों ने मेरिट में स्थान बनाया है।
सरकारी स्कूलों के टीचरों से बच्चों को पढ़ाने के अलावा पशु गणना, जनगणना, बीएलओ ड्यूटी आदि गैर शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन टीचरों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं करवाने चाहिए।
-डॉ. सोहन सिंह माजिला, प्रदेश महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ
अशासकीय स्कूलों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, इसके बावजूद इन स्कूलों का प्रदेश भर में बेहतर प्रदर्शन रहा है। इन स्कूलों ने हमेशा की तरह इस साल भी प्रदेश को टॉपर दिए हैं। सरकार इन स्कूलों की ओर ध्यान दे तो और अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं।
-अनिल नौटियाल, जिला मंत्री उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ