इसके बाद वर्ष 2013 में एक साइट सलेक्शन कमेटी (सीएससी) बनी। इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल थे। इस कमेटी ने जमीन को उपयुक्त पाया। तत्पश्चात वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया। पेड़ भी काटे गए और सुरक्षा दीवार का निर्माण हो गया।
इसके बाद सितंबर 2017 में सीपीडब्लूडी के दो इंजीनियरों से एमएचआरडी ने पुन: परीक्षण करवाया। उन्होंने जमीन को अनुपयुक्त बता दिया।
काला का कहना है कि एनआईटी प्रशासन एमएचआरडी को गलत जानकारी देता आया है। सिर्फ दो लोगों की रिपोर्ट पर जमीन अनुपयुक्त बताना साजिश है। उन्होंने पूरे तथ्यों और फोटोग्राफ के साथ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ी तो, सुमाड़ीवासी 200 एकड़ जमीन और देने को तैयार हैं।