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एनआईटी उत्तराखंड के मामले दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

Mon, 10 Dec 2018 10:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
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सामान के साथ प्रदर्शन करते छात्र - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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एनआईटी उत्तराखंड के मामले में दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर आज नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की अदालत में सुनवाई होगी। सुमाड़ी निवासी समाजसेवी मोहन काला ने गत नवंबर माह में जनहित याचिका दाखिल की थी। 

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दरअसल वर्ष 2012 में श्रीनगर से करीब 20 किलोमीटर दूर सुमाड़ी सहित अन्य गांव के लोगों ने एनआईटी के स्थायी कैंपस निर्माण के लिए नापभूमि दान में दी थी। यहां नापभूमि और सरकारी भूमि मिलाकर लगभग 300 एकड़ जमीन तकनीकी शिक्षा समिति को ट्रांसफर की गई थी, लेकिन वर्ष 2012 में तीन सदस्यीय कमेटी ने इस भूमि को अनुपयुक्त बता दिया। तब से भूमि चयन का मामला लंबित है और इसी वजह से आज तक एनआईटी का निर्माण नहीं हुआ है।

समाजसेवी मोहन काला का कहना है कि वर्ष 2012 में एनआईटी की ओर से गठित कमेटी ने गलत रिपोर्ट दी है। तीन सदस्यीय इस कमेटी में तत्कालीन निदेशक के दो परिचित थे और निदेशक नहीं चाहते थे कि पहाड़ में एनआईटी बने, इसलिए उन्हीं के अनुसार रिपोर्ट तैयार हुई।

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'एनआईटी प्रशासन एमएचआरडी को गलत जानकारी देता आया है'

इसके बाद वर्ष 2013 में एक साइट सलेक्शन कमेटी (सीएससी) बनी। इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल थे। इस कमेटी ने जमीन को उपयुक्त पाया। तत्पश्चात वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया। पेड़ भी काटे गए और सुरक्षा दीवार का निर्माण हो गया।

इसके बाद सितंबर 2017 में सीपीडब्लूडी के दो इंजीनियरों से एमएचआरडी ने पुन: परीक्षण करवाया। उन्होंने जमीन को अनुपयुक्त बता दिया।

काला का कहना है कि एनआईटी प्रशासन एमएचआरडी को गलत जानकारी देता आया है। सिर्फ दो लोगों की रिपोर्ट पर जमीन अनुपयुक्त बताना साजिश है। उन्होंने पूरे तथ्यों और फोटोग्राफ के साथ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ी तो, सुमाड़ीवासी 200 एकड़ जमीन और देने को तैयार हैं।
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