मुसीबतों से डरकर गलत कदम उठाने वालों के लिए अविनाश एक मिसाल है। उन्होंने नीट की परीक्षा में ऑल इंउिया 160वीं रैंक हासिल कर प्रदेश में नाम रोशन किया है। एक साल पहले सिर से पिता का साया उठने के बावजूद अविनाश ने हार नहीं मानी। मेहनत जारी रखी। अब काबयाबी मिली तो पापा नहीं है, इस बात का गम है।
मूलरूप से बलिया के रहने वाले अविनाश का बचपन कोटद्वार में गुजरा। पिता डॉ. कौशल कुमार नेत्र चिकित्सक और कोटद्वार में सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में तैनात थे। ऐसे में अविनाश ने भी पिता की ही तरह डॉक्टर बनने का सपना देखा। जिसे पूरा करने वह पूरी शिद्दत से जुट गए। कोटद्वार के डीएवी पब्लिक स्कूल से 12वीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल कर खुद को साबित कर दिखाया। इसके बाद बलूनी क्लासेज से मेडिकल की कोचिंग लेनी शुरू की। इस बीच पिछले साल पिता का साया उनके सिर से उठ गया।