आईआईटी रुड़की भूकंप के पूर्वानुमान की पहली परीक्षा में ही फेल हो गया। सोमवार रात आए 5.8 मैग्नीच्यूड तीव्रता के भूकंप के बावजूद आईआईटी परिसर में वार्निंग जारी नहीं हो पाई, जबकि इससे पहले आईआईटी रुड़की और गढ़वाल के कई क्षेत्रों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से अपडेट करने का दावा किया गया था।
इसके लिए लाखों रुपये के इंस्ट्रूमेंट गढ़वाल क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। हालांकि प्रोजेक्ट हेड का तर्क है कि भूकंप की तीव्रता छह मैग्नीच्यूड से कम की वजह से वार्निंग जारी नहीं हो पाई।
आईआईटी रुड़की ने करीब दो वर्ष पहले गढ़वाल क्षेत्र में जगह-जगह लगभग सौ इंस्ट्रूमेंट स्थापित किए थे। इसके बाद आईआईटी रुड़की को भी अर्ली वार्निंग सिस्टम से लैस किया गया।
भूकंप के केंद्र के पास ही लगाए गए हैं इंस्ट्रूमेंट
रुद्रप्रयाग में था भूकंप का केंद्र
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उस समय दावा किया गया था कि भूकंप आने पर छात्र-छात्राओं और आईआईटीयंस को इसकी चेतावनी पहले मिल जाएगी, लेकिन सोमवार रात आए भूकंप के बाद सिस्टम से कोई वार्निंग जारी नहीं हुई।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ के पास भूकंप का केंद्र बताया जा रहा है, वहां पहले ही आईआईटी रुड़की ने कई इंस्ट्रूमेंट स्थापित किए हुए हैं।
वैज्ञानिकों का दावा था कि इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से आसपास क्षेत्रों में भूकंप आने की चेतावनी 30 सेकेंड पहले आईआईटी रुड़की परिसर में जारी कर दी जाएगी, लेकिन सोमवार रात 5.8 मैग्नीच्यूड तीव्रता का भूकंप आने के बावजूद इसकी वार्निंग जारी नहीं हुई।
प्रोजेक्ट हेड का यह है कहना
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इस संबंध में प्रोजेक्ट हेड और आईआईटी के प्रोफेसर अशोक कुमार ने बताया कि छह मैग्नीच्यूड या इससे अधिक की तीव्रता पर ही भूकंप की चेतावनी जारी हो पाएगी। क्षेत्र में लगाए गए इंस्ट्रूमेंट से कई रिकार्ड प्राप्त हुए हैं। उनका आकलन किया जा रहा है। मालूम हो कि इससे पहले भूकंप के पूर्वानुमान के लिए जानवरों पर कई शोध किए, लेकिन कोई कारगर नहीं हो पाए।