निर्देशों के तहत दोबारा लॉग इन कराया गया, लेकिन इस प्रक्रिया में कई अभ्यर्थियों का 10 से 25 मिनट तक का समय लग गया। सचिन के मुताबिक ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय भी दिया गया। लेकिन अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कोई अलग से टाइम नहीं मिला। न ही परीक्षा केंद्र पर मौजूद लोगों को ऑनलाइन परीक्षा की जानकारी थी। परीक्षा खत्म हुई तो इसके बाद अभ्यर्थियों ने हंगामा शुरू कर दिया।
उन्होंने कॉलेज प्रशासन और परीक्षा आयोजकों पर मनमानी करने, गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए भविष्य बर्बाद करने का आरोप भी लगाया। अभ्यर्थी सौम्या का आरोप है कि कक्ष निरीक्षकों को ही ऑनलाइन परीक्षा की पूरी जानकारी नहीं थी। हमने पूछा कि एग्जिट कर दें तो हमें रोक दिया गया। बाद में न जाने कैसे एग्जिट किया होगा।
हालांकि डीडी कॉलेज के चेयरमैन जितेंद्र यादव का कहना था कि उनका काम केवल संसाधन उपलब्ध कराना था, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं है। जिस कंपनी ने परीक्षा कराई है, सर्वर डाउन होने और अभ्यर्थियों को परेशानी होने की जिम्मेदारी उनकी ही बनती है। दूसरी ओर, परीक्षा के समन्वयक डॉ. विनय ने पूरे मामले की रिपोर्ट परीक्षा की जिम्मेदार कोच्चि स्थित विधि संस्थान को भेज दी है।
सिफि कंपनी के प्रतिनिधि सचिन का कहना था कि सर्वर की जो समस्या आई थी, उसकी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में उनके स्तर से कोई चूक नहीं हुई है।