केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूलों में अब मनमानी शुल्क बढ़ोतरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देशभर से आई शिकायतों के आधार पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की सख्ती के बाद सीबीएसई ने सभी स्कूलों को सख्त हिदायती पत्र जारी किया है। इसके तहत मनमानी करने वाले स्कूलों की सीधे मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जा सकती है।
सीबीएसई के रीजनल ऑफिसर मनोज श्रीवास्तव की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक बोर्ड ने देशभर के लिए यह सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत हर स्कूल में शुल्क ढांचा केवल स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) ही तय करेगी।
स्कूल के नाम कैपिटेशन फीस नहीं
अभी तक स्कूलों में एसएमसी के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है और तमाम स्कूल अपनी मनमर्जी से शुल्क तय करते हैं। इस वजह से हर साल अभिभावक परेशान रहते हैं। उन्होंने बताया कि एसएमसी में अभिभावक, शिक्षा विभाग के राजपत्रित अधिकारी शामिल होते हैं।
इसकी बैठक में सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर तय किया जाता है कि कितना शुल्क बढ़ाया जाना है। बोर्ड के रूल 7.2 के मुताबिक स्कूल के खातों का लेखा-जोखा तैयार रखना चाहिए और हर एसएमसी बैठक में इस पर चर्चा होनी चाहिए।
रूल 11.1 के मुताबिक शुल्क के निर्धारण की अंतिम अनुमति संबंधित राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारी की होगी। कोई भी स्कूल एडमिशन के नाम पर कैपिटेशन फीस नहीं लेगा। अगर ऐसा पाया गया तो सीधे मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी।