सीवेज का न होना जोशीमठ में भू-धंसाव की एक वजह
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में 9.61 करोड़ की लागत से 27.67 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने के लिए एक आई एवं ही योजना को मंजूरी दी। योजना में नाला टैपिंग शामिल था लेकिन एसटीपी निर्माण के लिए प्रावधान नहीं था। 9.57 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद इस योजना को 2017 में बंद कर दिया गया। वहीं, 42.73 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद 2010 से 2017 की योजनाओं में विकसित अजसंरचना में किसी भी वर का सीवेज संयोजन नहीं था। जोशीमठ में भूमि धंसने की घटनाओं पर सीवेज प्रणाली की कमों को जिम्मेदार ठहराया गया। जिस पर 202 करोड़ की लागत से सीवर नेटवर्क बिछाने और घरेलू संयोजन दिए जाने के लिए एनएमसीजी को एक नया प्रारंभिक प्रस्ताव 2023 में प्रस्तुत किया गया था।
सीवेज शोधन संयंत्रों की गुणवत्ता पर भी उठाए सवाल
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि सीवेज शोधन संयंत्रों में सीवेज के शोधन की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। अधिकतर एसटीपी ने नेशनल घोन ट्रिब्यूनल या केंद्र सरकार के मानदंडों का पालन नहीं किया। देवप्रयाग तक जल की गुणवत्ता एक श्रेणी की थी। जबकि ऋषिकेश में गंगा नदी के जल की गुणवत्ता 2019 से 2023 तक की श्रेणी में रही। इस दौरान हरिद्वार जिले में भी गंगा नदी के जल की गुणवत्ता लगातार की श्रेणी में बनी रही। सात गंगा तटवर्ती नगरों में सीवेज संयोजन में मिली कमी कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कीर्तिनगर, चगोली और श्रीनगर में सीवेज संसोधन में कमी मिली है। यहां, एसटीपी नालों से आने वाले केवल धूसर पानी का ही शोधन कर रहे हैं।