फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैग की रिपोर्ट ने खोली 'फर्जी' अफसरों की मिस्ट्री

Thu, 24 Apr 2014 10:54 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन से जुड़े संस्थानों में चल रहे डेपुटेशन के गेम में कैग रिपोर्ट की आंच अब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तक जा पहुंची है।
विज्ञापन


बिना अनुमति के 59 अफसर
सीएजी ने रिपोर्ट में लिखा है कि मंत्रालयों की अनुमति के बिना आईसीएफआरई से जुड़े संस्थानों में 59 आईएफएस अधिकारी डेपुटेशन पर लाए गए, जबकि नियमानुसार अनुमति जरूरी है।

ऐसे में आशंका है कि मंत्रालय के ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है।

मार्च 2013 में आईसीएफआरई और इससे जुड़े संस्थानों में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ऑडिट के आधार पर यह बात सामने आई थी कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की अनुमति बिना 59 नए पद बनाकर उन पर डेपुटेशन पर आईएफएस अधिकारी तैनात कर दिए गए।
विज्ञापन


रिपोर्ट की गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि आईसीएफआरई में कोई भी आईएफएस केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना नहीं लाया जा सकता है।

यानी इन 59 अवैध पदों पर मंत्रालय ने ही डेपुटेशन पर आईएफएस की अनुमति दी है। सीएजी ने यह भी साफ लिखा है कि जिन पदों पर वैज्ञानिक होने चाहिए थे, वहां डेपुटेशन वाले आईएफएस तैनात हैं।

इस लिहाज से शोध कार्यों में होने वाली अड़चनों के लिए कहीं न कहीं मंत्रालय की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

मंत्रालय क्यों नहीं करता कार्रवाई
अपने अधीन आने वाली स्वायत्त संस्था आईसीएफआरई की पूरी कार्यप्रणाली को सुचारु रखने का जिम्मा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का भी है।

यहां लगातार अनियमितताएं सामने आईं, मंत्रालय के अधिकारियों ने आईसीएफआरई को आदेश, निर्देश भी भेजे लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

अहम सवाल यह है कि जब मंत्रालय अधिकार संपन्न है तो फिर वह खुद ही दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता।

सूत्र बताते हैं कि अगर संबंधित मंत्री और दूसरे आला अधिकारी चाहते तो निश्चित तौर पर मनमानी पर लगाम लगाई जा सकती थी। इससे मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े होने लाजिमी हैं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें