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कैग 2019 : कर्ज का ब्याज चुकाने के लिए उत्तराखंड सरकार ले रही है कर्ज

Wed, 11 Dec 2019 08:31 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • प्रदेश की आर्थिक विकास की वृद्धि दर अधिक लेकिन लोगों को नहीं मिल पा रहा है खास फायदा
  • राजस्व सरप्लस को बरकरार नहीं रख पाई सरकार, 2018 में राजस्व घाटा 1978 करोड़
  • कर्ज का करीब एक तिहाई का उपयोग ही सरकार विकास योजनाओं के लिए कर पा रही है
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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मंगलवार को सदन के पटल पर रखे गए भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की वर्ष 2017-18 तक की रिपोर्ट बता रही है कि प्रदेश अपने वित्तीय संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। आर्थिक रूप से राज्य समृद्ध हो रहा है लेकिन इसका फायदा लोगों को समग्र रूप से नहीं मिल पा रहा है। कर्ज के ब्याज को भुगतने के लिए तक कर्ज लेना पड़ रहा है। कर्ज का करीब एक तिहाई का उपयोग ही सरकार विकास योजनाओं के लिए कर पा रही है।

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वेतन, पेंशन और ब्याज पर खर्च बढ़ रहा है और सरकार के पास विकास कार्य के लिए धन कम हो रहा है। वर्ष 2013 से लेकर 2018 तक के राज्य की आर्थिक स्थिति की लेखा परीक्षा में कैग ने पाया कि वर्ष 2013 के राजस्व सरप्लस के स्टेटस को प्रदेश सरकार बाद के वर्षो के लिए बरकरार नहीं रख पाई।

प्रारंभिक घाटा (राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान हटाने पर प्राप्त राशि) भी लगातार बढ़ा और इसका मतलब यह है कि सरकार को उधार ली गई राशि के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है। इन सब के बीच नवजात मृत्यु दर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक पाई गई। इसी आधार पर कैग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश का सुझाव भी राज्य सरकार को दिया।
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पिछले कुछ सालों में तेज आर्थिक वृद्धि

कैग ने पाया कि बीते कुछ समय में राज्य का तेजी से आर्थिक विकास हुआ। 2008-09 से लेकर 2017-18 तक जीडीपी की प्रचलित दरों पर मिश्रित आर्थिक विकास दर (सीएजीआर) 16.30 प्रतिशत तथा प्रति व्यक्ति आय में यह विकास दर 14.70 प्रतिशत पाई गई।

यह अन्य विशेष श्रेणी के राज्यों से अधिक थी। इसी तरह प्रति व्यक्ति आय के मामले में उत्तराखंड की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक पाई गई। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोग उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तुलना में कम पाए गए।
 

मुख्य बिंदु

- 2013 से 2017 तक कर्ज के करीब 74 प्रतिशत का उपयोग पूर्व में लिए गए कर्ज का भुगतान करने और उस पर लिए गए ब्याज का भुगतान करने के लिए किया गया। इसलिए कर्ज का केवल 25.41 प्रतिशत से लेकर 39.10 प्रतिशत तक का उपयोग विकास योजनाओं के लिए उपयोग हो पाया।
- बकाया कर्ज लगातार बढ़ा और यह प्रदेश की विकास दर से अधिक रहा। 2013 से लेकर 2018 के बीच प्रदेश सरकार ने कर्ज के ब्याज के भुगतान के लिए राजस्व का करीब 12.64 प्रतिशत का उपयोग किया।
- राजकोषीय घाटे में राजस्व घाटे का योगदान 2016-17 में सात प्रतिशत था जो अगले वर्ष 25 प्रतिशत हो गया।
- विभागों ने मार्च 2018 तक 164.92 करोड़ रुपये के अनुदानों से संबंधित 102 उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार उत्तराखंड को उपलब्ध नहीं कराए।
- आकस्मिकता निधि के 231.51 करोड़, 2016-17 में 156.07 करोड़ और 2017-18 में 75.44 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति अगस्त 2018 तक नहीं हुई ।
- ब्याज भुगतान के लिए वर्ष 2017-18 में सरकार को कुल 7526 करोड़ में से 3987 करोड़ रुपये उधार लेना पड़ा।
- सरकार ने वर्ष 2013-14 से वर्ष 2017-18 तक 8.13 प्रतिशत औसत ब्याज दर से  भुगतान किया।
- नवजात शिशु मृत्यु दर उच्च पाई गई।

प्रारंभिक घाटा
2015-16                 3154
2016-17                 1744
2017-18                3948

राजस्व घाटा
2014-15                  917
2015-16                 1852
2016-17                 383
2017-18                1978

2013-14 में राजस्व सरप्लस
राजकोषीय घाटा
2013-14                     2650 
2014-15                     5826
2015-16                     6125
2016-17                     5467
2017-18                     7935
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यहां रहे सफल 

1. करेत्तर राजस्व में 31 प्रतिशत इजाफा
2.पूंजीगत व्यय में 19 प्रतिशत वृद्धि हुई। पूंजीगत खर्च बताता है कि प्रदेश सरकार विकास योजनाओं के लिए कितना पैसा जुटा रही है
3. कर्ज के भुगतान में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मतलब यह कि सरकार कर्ज से निपटने को लेकर कितनी गंभीर है

यहां रहे असफल

1. स्वयं के कर संग्रह में सात प्रतिशत की कमी हुई। स्वयं का कर संग्रह जीएसटी, होटल कर आदि से प्राप्त होता है।
2. कर्ज और एडवांस की वसूली में चार प्रतिशत की कमी हुई
3. कर्ज प्राप्तियों में 16 प्रतिशत का इजाफा हुआ
4. राजस्व व्यय 15 प्रतिशत बढ़ा। मतलब यह कि सरकार वेतन, पेंशन और ब्याज जैसी वचनबद्ध मदों में अधिक खर्च कर रही है

बजट अनुमान भी नहीं रहा हैं सटीक

कैग रिपोर्ट यह भी इशारा कर रही है कि प्रदेश सरकार के बजट अनुमान भी सही साबित नहीं हो रहे हैं। किसी वर्ष का बजट तैयार करते समय वित्त विभाग यह अनुमान लगाता है कि सरकार के पास कहां-कहां से पैसा आएगा और कहां-कहां यह पैसा खर्च होगा। एक साल बाद उस वित्तीय वर्ष के वास्तविक आंकड़े सरकार को प्राप्त होते हैं।

2018 के बजट की समीक्षा में कैग ने पाया कि राज्य ने पूंजीगत व्यय (विकास योजनाओं के लिए धनराशि) 5514 करोड़ रुपये का लगाया था लेकिन खर्च 5914 करोड़ हुआ। बजट अनुमान में राजकोषीय घाटा 2464 करोड़ और प्रारंभिक घाटा 2887 करोड़ रुपये रहने का अनुमान था। राजकोषीय घाटा 5471 करोड़ और प्राथमिक घाटा 1061 करेाड़ रहा। 

साबित हुआ जीएसटी से राज्य को नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड अब औद्योगिक राज्य है। ऐसे मेें राज्य में उत्पादित वस्तुओं पर कर संग्रहण राज्य से बाहर जा रहा है। अभी राज्य को जीएसटी से हो रहे नुकसान की भरपाई 2022 तक केंद्र सरकार कर रही है। ऐसे में राज्य की चिंता 2022 के बाद भी है। इस पर राज्य के स्वयं के कर संग्रह में भी कमी आ रही है।

उपभोक्ता जरूर इससे कुछ हद तक फायदा ले रहे हैं। जीएसटी से पहले राज्य मेें वस्तुओं पर कर की दर पांच प्रतिशत, 14.5 प्रतिशत थी। जीएसटी में अधिकतर वस्तुओं पर कर की दर 2.5 प्रतिशत और छह प्रतिशत है। जीएसटी में राज्य ने 4835.70 करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान लगाया था जो 5259.37 करोड़ रहा।
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