कैग ने विभाग के राष्ट्रीय सूचना केंद्र के सहयोग से बनाए गए ईएसपीएएन साफ्टवेयर में डेटाबेस की गंभीर खामियां उजागर की। कैग ने पाया कि आयु कालम में 901 वर्ष तक की आयु को देखा गया। 4000 रुपये से अधिक की राशि के इनपुट को रोकने के लिए इनपुट कंट्रोल की कमी थी। मोबाइल नंबर बीपीएल डेटाबेस से लिंक, प्रणाली में एक हजार तक प्रति व्यक्ति पेंशन सीमित करने का कोई प्रावधान नहीं था। पुत्र की मासिक आय व पुत्र व्यवसाय कालम में शून्य है, जबकि यह पेंशन की पात्रता का अहम मानक है।
4,000 रुपये से अधिक मासिक आय वालों को भी पेंशन
सरकार के निर्णय के अनुसार 4000 रुपये तक की मासिक पारिवारिक आय वालों को पेंशन का लाभ मिलता है। लेकिन विभाग ने मानकों की अनदेखी कर 2015-16 से 2017-18 के दौरान 295 लोगों को 83 लाख रुपये की पेंशन स्वीकृत कर दी।
पति पत्नी को भी पेंशन
अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़ व यूएसनगर में 1147 मामलों में पति और पत्नी को 4.18 करोड़ रुपये की पेंशन बांट दी गई।
पेंशन का बकाया भुगतान नहीं किया
कैग ने पाया कि वर्ष 2017-18 में चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और यूएस नगर में 34,551 लाभार्थियों को धन की कमी के चलते 15.25 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया। वर्ष 2016 में 6,703 बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई। आधार कार्ड की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद बकाया पेंशन 7.79 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया।
ये कमियां भी उजागर
- पेंशन मामलों के अनुश्रवण व मूल्यांकन के लिए राज्य और जिलास्तर पर समितियां नहीं बनाई गई। राज्य स्तरीय समिति मुख्य अधिकारी की अध्यक्षता में गठित होनी है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति का गठन होना था। लेकिन लेखा अवधि में ये दोनों समितियां नहीं बनीं।
- कैग ने पाया कि विकास खंड, जनपद, नगर पालिका स्तर पर शिकायत निवारण प्रणाली का गठन नहीं किया गया। जबकि एनएसएपी के इसे लेकर दिशा-निर्देश हैं।
- एनएसएपी की गाइडलाइन के हिसाब से विभाग में सोशल ऑडिट की भी व्यवस्था नहीं थी। कैग ने भौतिक सत्यापन की भी कमी पकड़ी।