बागियों से भाजपा को लगे सियासी डेंट पर अब संगठन ‘कैडर मार्का’ पेंट चढ़ाने के काम में जुट गई है। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के कानों में निर्दलीय उतरे बागियों से दूरी बनाने का मंत्र फूंक रही है। जो असंतुष्ट भारी मन के साथ अभी भी पार्टी में हैं उनको इलेक्शन के बाद बड़ी जिम्मेदारी देने की डोज पिलाई जा रही है।
डेढ़ दर्जन निर्दलियों के बाद अब पार्टी के सामने अगला खतरा कुछ सीटों पर भितरघात का भी मंडरा रहा है। इससे पहले कि भितरघात सर उठाए, पार्टी उन लोगों पर निष्कासन का डंडा चलाने की तैयारी कर चुकी है, जो बेशक अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ नहीं खड़े हैं, लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों में सक्रिय हैं।
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल ने हर संगठन जनपदों में असंतोष की टोह लेने के लिए अपना तंत्र सक्रिय कर दिया है। रामलाल खुद घूम घूम कर हर विधानसभा क्षेत्र की बैठक कर रहे हैं। महामंत्री संगठन के सक्रिय होने से आरएसएस की सक्रियता भी बढ़ी है। संघ अपने स्तर पर सभी सीटों का सर्वेक्षण करने का काम पहले ही शुरू कर चुका है। पार्टी के लिए बड़ी चुनौती निर्दलीय उतरे बागियों के क्षेत्रों को लेकर दिख रही है।
वहां पार्टी कैडर को साथ बनाए रखने के लिए बूथ स्तर के पदाधिकारियों से प्रत्येक विधानसभा प्रभारी संपर्क साध रहे हैं। संगठन सहमंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू इस काम में जुटे हुए हैं। जिन दावेदारों को टिकट नहीं मिले हैं उनको साफ कर दिया है कि विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी को किये सहयोग से उनका मूल्यांकन होगा। इतना ही नहीं असंतुष्टों को चुनाव के बाद संगठन में जिम्मेदारी या फिर सरकार बनने पर एडजस्ट किये जाने के आश्वासन भी दिए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो टिकट कटने वाले विधायक तीरथ सिंह रावत सहित यमकेश्वर विधायक विजय बड़थ्वाल और धनोल्टी विधायक महावीर रांगड़ को आश्वस्त किया गया हैद कि उनको अहम जिम्मेदारी मिलेगी। हालांकि यह टोटका निर्दलियों को रिझाने के काम नहीं आया।
पार्टी ने 18 निर्दलीय उतरे बागियों का भले पार्टी ने छह वर्ष का निष्कासन कर दिया है, लेकिन उनके से कुछ के अभी भी पार्टी संपर्क में है। भाजपा के प्रत्याशी के पक्ष में बैठाने का आखिरी दांव चलने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ भाजपा की अगली रणनीति स्टार प्रचारकों को उतारने की है। पार्टी प्रचार अभियान की पेस बढ़ाकर बगावत के मुद्दे को गौण करने की कोशिश करेगी। हर विधानसभा में किसी न किसी स्टार की ड्यूटी लगी है।
भितरघात की टोह ले रहे रामलाल
प्रदेश में किन सीटों पर असंतुष्टों की नाराजगी बनी है, इसकी टोह लेकर भितरघात से संभावनाओं से निपटने की तैयारी चल रही है। ऊधमसिंह नगर के बाद राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल गुरुवार को प्रदेश कार्यालय पर देहरादून जनपद के पदाधिकारियों और असंतुष्टों से मिले। टिकट कटने से नाराज दावेदारों को विशेष तौर पर बैठक में बुलाया गया था।
इस दौरान रामलाल ने 12 विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों और पदाधिकारियों की बैठक ली, जिसमें दस देहरादून जनपद की और दो उत्तरकाशी जनपद की विधानसभाएं हैं। बैठक में टिकट कटने से नाराज दावेदारों को विशेष रूप से बुलाया गया था। धर्मपुर, विकासनगर, रायपुर, ऋषिकेश, डोईवाला और कैंट विधानसभा में टिकट कटने से कई कार्यकर्ता मायूस हैं, जिनमें महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल, कुलदीप कुमार आदि शामिल हैं। इसके रुड़की और हरिद्वार में भी बैठकें की गई।