देहरादून में विधानसभा सत्र की गहमा गहमी के बीच सोमवार को हुई कैबिनेट में सरकार का जोर पिछले मसलों को निपटाने पर अधिक रहा।
कैबिनेट के अधिकतर फैसले लोगों को लुभाने वाले कम और दबाव को हटाने वाले अधिक रहे। आयु सीमा को 40 करने के मामले में भी सरकार को खासे दबाव का सामना करना पड़ रहा था।
आक्रोश को थामने की कोशिश
इसके उलट नर्सों, समीक्षा अधिकारियों, पटवारियों की मांगों पर कोई फैसला न होने से इनके आंदोलनों को हवा मिल सकती है। हालांकि सरकार ने पीटीए शिक्षकों का मानदेय दोगुना कर इन शिक्षकों के आक्रोश को थामने की कोशिश की है पर मामला लटकने से उपनल के संविदा कर्मी जरूर मायूस होंगे।
कैबिनेट ने पर्यटन की पंजीकरण नियमावली को मंजूरी देकर लंबे समय से लटके चले आ रहे एक जरूरी मामले को भी अमली जामा पहनाया। हालांकि अभी यात्रियों के पंजीकरण का मामला अटका हुआ है। यात्रा शुरू होने से पहले ही सरकार को इस मामले को भी अमली जामा पहनाना होगा।
पंजीकरण व्यवस्था की मांग
16-17 जून की आपदा के बाद ही प्रदेश में यह मांग उठने लगी थी। यह भी कहा गया कि पंजीकरण की व्यवस्था होती तो सरकार को यह भी अंदाजा रहता कि आपदा में कितने लोग फंसे हुए हैं और कितने लोगों का व्यवसाय प्रभावित हुआ।
पंजीकरण नियमावली को मंजूरी
ऐसे में आपदा के छह माह बाद कैबिनेट ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पंजीकरण नियमावली को मंजूरी दी। इस पंजीकरण हो जाने के बाद अब चार धाम यात्रा के में पहाड़ की ओर रुख करने वाले व्यवसायिक वाहनों का पंजीकरण होगा।
इसके अलावा ढाबा, होटल मालिक, ट्रेवल एजेंसी आदि का पंजीकरण होगा। यह पंजीकरण भी पर्यटन विभाग के तहत होगा। अभी तक इस तरह के पंजीकरण की कोई व्यवस्था प्रदेश में नही थी।
हालांकि सत्र के दौरान इस कैबिनेट के होने से पहले ही यह भी माना जा रहा था कि इस कैबिनेट में सरकार कई लोक लुभावन फैसले लेगी। पर तस्वीर का दूसरा पक्ष यह भी रहा कि कई दिनों से प्रचारित उपनल के संविदा कर्मियों को नियमित करने का मामाला भी कैबिनेट के एजेंडे में नहीं था।
बाद में यह मामला कैबिनेट के सामने उठा और इसमें कैबिनेट उपसमित का गठन करने का फैसला किया गया। इसी तरह समीक्षा अधिकारियों की मांगों से संबंधित मामले कैबिनेट के एजेंडे में थे पर इस पर सहमति नहीं बन सकी।