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धारचूला में धामी के हाथ होगी चुनाव की कमान

Mon, 23 Jun 2014 10:15 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, पिथौरागढ़
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को एम्स से छुट्टी मिलने में अभी देरी है। संभव है कि उन्हें एम्स से छुट्टी मिलने के बाद भी घर पर आराम करना पड़े।
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उपचुनाव की जिम्मेदारी धामी के हाथ
हालात पर गौर करें तो नामांकन के लिए भी मुख्यमंत्री का धारचूला आना संभव नहीं है। इस स्थिति में धारचूला के विधानसभा उपचुनाव की कमान पूरी तरह निवर्तमान विधायक हरीश धामी के हाथों में रहेगी।

मुख्यमंत्री को 31 जुलाई से पहले राज्य विधानसभा का चुनाव जीतना है। इसी को देखते हुए उनके नजदीकी धारचूला से विधायक हरीश धामी ने अपनी सीट छोड़ दी थी।

राज्य में 21 जुलाई को धारचूला, सोमेश्वर और डोईवाला में विधानसभा उपचुनाव होने हैं। अस्वस्थता के कारण मुख्यमंत्री का चुनाव कैंपेन में शामिल होना तो दूर नामांकन के लिए निर्वाचन कार्यालय जाना तक संभव नहीं दिखाई दे रहा है।
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चुनाव आयोग की गाइड लाइन में व्यवस्था है कि प्रस्तावक भी प्रत्याशी का नामांकन करा सकता है। संभावना है कि मुख्यमंत्री का नामांकन उनका प्रस्तावक ही कराएगा।

धारचूला के विधायक हरीश धामी लोकसभा चुनाव में अपनी सीट से कांग्रेस को ढाई हजार वोटों की बढ़त दिलाने में कामयाब रहे।

इससे साफ है कि धारचूला विधानसभा उप चुनाव की कमान पूरी तरह निवर्तमान विधायक हरीश धामी के हाथों में रहेगी।

पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर, चंपावत के विधायक हेमेश खर्कवाल, कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण भी धारचूला में मुख्यमंत्री के लिए मोर्चेबंदी करते दिखेंगे।
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मुख्यमंत्री के प्रति है सहानुभूति
मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रति धारचूला में सहानुभूति की लहर दिखाई दे रही है। लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के धारचूला से चुनाव लड़ने से क्षेत्र वीवीआईपी क्षेत्र का दर्जा पा जाएगा, वहां का विकास तेजी से होगा।

कांग्रेस की सरकार ने धारचूला के 111 गांवों को मृगविहार के दायरे से बाहर किया है। धारचूला, मुनस्यारी की 143 जातियों को ओबीसी का दर्जा दिया है।
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