चुनाव में ताल ठोक रहे प्रत्याशियों के लंबरदारों की खास पहरेदारी की तैयारी है। चुनावों में वोटों की खरीद-फरोख्त का पुराना इतिहास रहा है। ऐसे में अनगिनत इलाके चिह्नित किए गए है, जहां नोट और शराब चल सकती है। इसी को रोकने के लिए हर विधानसभा में ऐसे तत्व चिह्नित किए गए हैं, जो कई तरीकों से चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव में वोट के सौदागरों की पौ बारह का इतिहास रहा है। नोट और शराब के बल पर चुनाव प्रभावित करने के अनगिनत उदाहरण लोगों की जुबां पर हैं। इस मिथक को तोड़ने के लिए पुलिस-प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। चुनाव की घोषणा के साथ ही हर विधानसभा में चुनाव को प्रभावित करने वाले लोगों को चिह्नित करने का काम शुरू हुआ था।
प्रदेश भर में ऐसे लोगों की संख्या हजार से ऊपर है। इनमें सांप्रदायिक, जातीय आधार पर लोगों को बांटने वालों के अलावा ऐसे भी ठेकेदार है, जो वोट की खरीद-फरोख्त में अहम रोल निभाने के मास्टर रहे हैं। इसी लिहाज से ऐसे लोग खास निशाने पर है, जो प्रत्याशियों के लंबरदारों से नजदीकियां बनाए हैं।
सूत्रों की माने तो इन्हीं के जरिये वोटरों को प्रभावित किया जाता रहा है। खुफिया तंत्र की भी उन इलाकों पर नजर है, जहां लालच देकर गुल खिलाए जाने की सबसे ज्यादा संभावनाएं है। अगले दो दिन पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है।
चुनाव प्रभावित करने वालों से सख्ती से निपटने की तैयारी है। संदिग्ध लोगाें की गतिविधियों पर पुलिस और अभिसूचना इकाई की नजर है। साक्ष्य मिलते ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मतदान के अंतिम दिनो में पुलिस को और सतर्कता बरतने को कहा गया है।
- एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक