फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun: 'भांजी कोमा में है और एम्स में इलाज नहीं मिल रहा', सीएम धामी के आश्वासन के बाद भी ऐसा कर रहे डॉक्टर

Fri, 28 Oct 2022 01:02 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

बस हादसे में गंभीर घायलों के इलाज में कोताही का सच सामने आया है। एम्स में भर्ती मरीजों को सही से इलाज नहीं मिल रहा है। अमर उजाला की खबर पढ़कर परिजन ने व्हाट्स एप पर संदेश भेजा और सारी लापरवाही को सामने रखा। बताया कि बहुत सिफारिश के बावजूद एम्स में सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
अंजलि - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मेरी भांजी इस समय कोमा में है। बड़ी सिफारिश के बाद भी एम्स ऋषिकेश में सही इलाज नहीं मिल पा रहा। अमर उजाला की खबर पढ़कर एक परिजन ने यह व्हाट्स एप संदेश भेजा। संदेश में उन्होंने बस हादसे में गंभीर घायलों के इलाज में बरती जा रही कोताही का सच भी उजागर किया।

विज्ञापन


उन्होंने अपने संदेश में लिखा, मेरी भांजी अंजलि (18 वर्ष) बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। भांजी के पिता की दुर्घटना में मृत्यु हो गई और भाई भी घायल हुआ। भांजी एम्स में भर्ती है और कोमा में है। बहुत सिफारिश के बावजूद एम्स में सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।

संपर्क करने पर परिजन ने अमर उजाला को बताया कि पहले तो दवाइयां वहीं से दी जा रही थीं, अब दवाइयां भी बाहर से लिखी जा रही हैं। दवाइयां महंगी हैं और अकेली होने के कारण दवाइयां लाने में दीदी को बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सारा इलाज सरकारी खाते से कराने की घोषणा की थी तो डॉक्टर बाहर से दवाइयां लाने के लिए क्यों कह रहे हैं?

विज्ञापन
विज्ञापन

मुख्यमंत्री से किया अनुरोध
पीड़ित ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मृतक आश्रितों को दो लाख, ज्यादा गंभीर घायलों को एक लाख, और घायलों को 50 हजार रुपये देने की भी घोषणा की थी। लेकिन अखबार में खबर छपने के बाद जो चेक बांटे गए, उसमें घायलों को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की जानकारीप्राप्त हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि एम्स प्रबंधन को ताकीद करें ताकि उनकी भांजी को उचित इलाज मिल सके।

ये भी पढ़ें...Uttarakhand News:  अस्थायी शिक्षकों को झटका, हिमाचल की तरह उत्तराखंड में नहीं हो पाएंगे नियमित

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें