दिवाली पर पटाखे जलाने का असर शहर के वातावरण पर पड़ा है और शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। प्रदूषण बढ़ने से अस्पतालों की ओपीडी में सांस, अस्थमा, फेफड़े और गले की समस्या के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में सांस फूलने के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इसके अलावा फेफड़ों की समस्या, गले की समस्या के मरीज भी दोगुने हो गए हैं। पिछले दो दिन में इन समस्याओं के 100 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। निजी अस्पताल के डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण से बच्चों के साथ बड़े लोगों को भी समस्या हो रही है। फेफड़ों की समस्या भी बढ़ गई है। अस्पतालों की ओपीडी में इन सभी समस्याओं के मरीज बढ़ गए हैं। मरीजों का उपचार किया जा रहा है, हालत बेहतर हो रही है।
Iप्रदूषण में सिकुड़ जाती है सांस नलीI
निजी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल अरोड़ा ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने पर सांस नली सिकुड़ जाती है और सही से सांस नहीं आ पाती। इसलिए फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में जिनका दिल कमजोर है उनके दिल में भारीपन की समस्या, दिल में दर्द की समस्या और हार्ट फेल हो सकता है। इन दिनों इस तरह के मरीज बढ़ गए हैं। प्रदूषण के अलावा सर्दी से भी बचाव जरूरी है। इसलिए सुबह और शाम के समय घर से बाहर ना निकलें। अगर निकलना है तो मास्क लगाकर निकलें।