इस पर बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अतुल पुंडीर और अधिवक्ता अभिमांशु ध्यानी ने अदालत में तर्क रखे। उन्होंने अदालत को बताया कि धोखाधड़ी की धारा तभी बनती है जब पीड़ित का नुकसान हुआ हो। इस मामले में पैसा अनिल गुप्ता और अजय गुप्ता का लगा हुआ था। ऐसे में साहनी का नुकसान नहीं हुआ। इसके साथ ही दोनों अपने पैसे मांग रहे थे। पुलिस ने धाराएं बढ़ाईं, लेकिन इनके कारणों का कोई खुलासा नहीं किया गया।
मौजूदा विवाद को उन्होंने साझीदारी के बीच वित्तीय विवाद की श्रेणी का बताया। उन्होंने इस आधार पर हर प्रकार की शर्त को मानते हुए जमानत की मांग की। लेकिन, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शाहिस्ता बानो की कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए दोनों धाराओं में न्यायिक अभिरक्षा मंजूर कर दी। इसके साथ ही दोनों की जमानत को नामंजूर कर दिया गया। अब जमानत पर जिला एवं सत्र न्यायालय में आगामी तीन जून को सुनवाई होगी।
स्याही फेंकने के मामले में अज्ञात पर मुकदमा
पुलिस ने अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता पर स्याही फेंकने के मामले में अज्ञात के खिलाफ बलवा और लोक सेवक के कार्यों में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया है। इसके लिए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। हालांकि, स्याही फेंकने वाले संगठन ने खुद सोशल मीडिया पर अपने इस कारनामे का खुलासा किया और मीडिया को अपने बयान दिए। बताया जा रहा है कि जल्द ही आरोपियों के नामों का खुलासा कर पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।