पूर्णिमा का स्नान करने रविवार को देशभर से दस लाख से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे। हरकी पैड़ी सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर दिनभर स्नान चलता रहा। घाटों पर यज्ञोपवीत व मुंडन संस्कार संपन्न कराए गए। जगह-जगह लघु कथाएं हुई और श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया।
तीन बजे से शुरू ह़ुअ पूजा का दौर
तड़के तीन बजे से स्नान प्रारंभ हुआ। चौकस प्रबंधों के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा मैया का जयघोष करते हुए गोते लगाए और नियत स्थलों पर जाकर दान-पुण्य किया। उगते सूर्य देव को स्नानार्थियों ने अर्घ्य प्रदान किया। स्नानार्थियों में सर्वाधिक भीड़ पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश से आए श्रद्धालुओं की थी। गुजरात से भी खासी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लोग
उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों से पहुंचे परिवारों ने अपने पुत्रों के मुंडन व यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराए। सिंधी नागरिक भी यज्ञोपवीत कराने के लिए हरिद्वार पहुंचे।
सिंधी समाज के कई आश्रमों व धर्मशालाओं में मंगलोत्सव मनाया गया। जिस समय सूर्य देव उदय हो रहे थे, उस समय सिंधियों ने आतिशबाजी भी की। श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट के साथ-साथ नारायणी शिला पर भी कर्मकांड कराया।