गैरसैंण में होने जा रहे बजट सत्र पर प्रदेश और प्रदेश से बाहर रह रहे लाखों उत्तराखंडियों की निगाहें लगी होंगी। इस बार वे उम्मीद कर रहे हैं कि प्रचंड बहुमत की सरकार उत्तराखंड को स्थायी राजधानी का तोहफा देगी। सत्र के दौरान गैरसैंण के भाग्य का फैसला करेगी।
देश का अकेला राज्य जिसकी नहीं स्थायी राजधानी
उत्तराखंड देश का अकेला ऐसा राज्य है जिसकी अपनी कोई स्थायी राजधानी नहीं है। जबकि राज्य स्थापना से पहले ही पहाड़ी राज्य राजधानी पहाड़ (गैरसैंण) में तय हो चुकी थी। लेकिन राज्य गठन के बाद सत्तारुढ़ रही प्रदेश सरकारें स्थायी राजधानी के सवाल को टालती रही।
सुलग रहा है स्थायी राजधानी का आंदोलन
प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद स्थायी राजधानी की पहेली के हल होने की उम्मीद जागी है। प्रदेश सरकार की ओर से भी गैरसैंण पर कोई बड़ा फैसला करने के संकेत बार-बार आ रहे हैं। इस बीच राजधानी देहरादून समेत राज्य के कुछ इलाकों में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाये जाने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया है। लेकिन आंदोलन देहरादून, गैरसैंण, रुद्रप्रयाग तक सीमित है।
प्रवासियों में भी जोश, पीएम को देंगे ज्ञापन
उत्तराखंड में चल रहे आंदोलन पर दिल्ली में लाखों प्रवासी उत्तराखंडियों की भी निगाह लगी है। प्रवासी उत्तराखंडी संगठन के अनिल पंत के मुताबिक नौ फरवरी को प्रवासी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग करेंगे।
अब गैरसैंण सत्र पर निगाहें
त्रिवेंद्र सरकार ने पहली बार गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में बजट सत्र करने का फैसला किया है। सत्र के ऐलान के बाद से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने को लेकर आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों और लाखों प्रवासी उत्तराखंडियों की बजट सत्र पर निगाहें लग गई हैं। वे आशा कर रहे हैं कि सरकार सत्र के दौरान गैरसैंण और राजधानी को लेकर कोई बड़ी घोषणा करेगी। भाजपा ने अपने चुनावी विजन डाक्यूमेंट में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का वादा किया है। लेकिन आंदोलनकारी गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।