उत्तराखंड के अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दो महीने की दवाओं का इंतजाम हो गया है।
शासन ने महानिदेशालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को चार करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। लेकिन यह बजट ऊंट के मुंह में जीरा जैसा ही है। प्रदेश को दवाओं की जरूरत के लिहाज से इस वित्तीय वर्ष में अभी तक आधा बजट ही जारी हुआ है।
शासन के चार करोड़ रुपये बजट जारी कर देने से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से रोगियों को थोड़ी-बहुत दवाएं मिलती रहेंगी। दवाओं का बजट जारी न होने की वजह से महानिदेशालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण में स्टॉक बिल्कुल खत्म हो चुका है। अगर कोई आपात स्थिति हो तो स्टॉक में एक टेबलेट तक नहीं है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की किल्लत होने से मरीजों को परेशानी होने लगी।
यह मामला ‘अमर उजाला’ ने रविवार को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर शासन ने सोमवार को चार करोड़ रुपये बजट महानिदेशालय को जारी कर दिए हैं। इस संबंध में महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. डीएस रावत ने बताया कि स्टॉक की दवाएं स्वास्थ्य केंद्रों को दी जा चुकी हैं।
जो बजट मिला है उससे स्टॉक भी कर लिया जाएगा। दवाओं के आर्डर कंपनियों को पहले ही दिए जा चुके हैं। इससे कंपनियों का भुगतान भी हो जाएगा। दूसरे स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इससे दो महीने का काम चल जाएगा। यह मौसम फ्लू और दूसरे वायरल संक्रमण फैलने का होता है।
रोगी बढ़ने से दवाओं की अधिक जरूरत पड़ेगी। बता दें कि चुनाव के एक महीने पहले दवाओं के लिए महानिदेशालय ने पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इससे चुनाव के दौरान होने वाली किसी इमरजेंसी से निपटने की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन बजट अब जारी किया गया है।