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बजट में ज्यादा दम नहीं पर राहत भी कम नहीं

Tue, 18 Feb 2014 10:26 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को अंतरिम बजट पेश कर दिया। बजट प्रावधानों को लेकर किसी तरह का उत्साह आम लोगों में नहीं दिख रहा। नौकरीपेशा, गृहिणी, युवा सभी इस बजट को चुनावी करार दे रहे हैं।
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उनका कहना है कि बेशक यह चुनावी बजट है। इसमें कोई दम नहीं। फ्रिज, टीवी, मोबाइल को सस्ता होने को हालांकि वह अच्छी राहत करार दे रहे हैं। कुछ इस अंदाज में उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी

चुनावी बजट, नया टैक्स नहीं

यह चुनावी बजट है। फ्रिज, टीवी, मोबाइल जैसी चीजों को सस्ता किया गया है, लेकिन महंगाई के आलम में कुछ और राहत की दरकार थी। कोई नया टैक्स न लागू कर वित्त मंत्री ने खुश करने की कोशिश की है।
जेबी पॉल, प्रिंसिपल, सीएनआई।

रसोई को राहत नहीं
बजट में नया टैक्स नहीं लगाया गया। मोबाइल सस्ते हुए यह तो ठीक हुआ। लेकिन अन्य कोई राहत बजट में नहीं प्रदान की गई। एक गृहिणी के रूप में कहूं तो रसोई को किसी तरह की राहत इस बजट में नहीं दी गई।
पारस गुप्ता, शिक्षिका एवं गृहिणी।

आम आदमी के लिए नहीं
यह बजट आम आदमी का बजट नहीं। इसमें रसोई से जुड़ी महंगाई कम करने या हाउस होल्ड उत्पादों को सस्ता करने के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। कारों पर एक्साइज ड्यूटी की कमी से बहुत फायदा नहीं होगा।
अनिल कुमार, नौकरीपेशा।

युवा के लिए अच्छा बजट
यूथ के लिए अच्छा बजट है। मोबाइल सस्ता हुआ है। टीवी सस्ता है, कार, मोटरसाइकिल को भी सस्ता किया गया है। आम युवा के लिए इससे बेहतर बजट नहीं हो सकता। हालांकि खेल वर्ग को भी छूना चाहिए था।
राजा रावत, फुटबाल खिलाड़ी।

कांग्रेस में उत्साह, भाजपा ने कहा निराशाजनक

केंद्रीय अंतरिम बजट को कांग्रेस ने उत्साहजनक तो भाजपा ने देश का सबसे निराशाजनक बजट करार दिया। आम जनता के लिए बड़ी राहत नहीं होने पर लोगों ने भी बजट में कम दिलचस्पी दिखाई।

कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष मनोज नौटियाल ने बताया कि आम बजट को बेहद संतुलित बनाया गया है, जिसके दूरगामी लाभ होंगे। युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी ने बताया कि कार, मोबाइल, बाइक सस्ती होने से युवाओं को लाभ मिलेगा।

छात्र नेता मनीष यादव और अजय रावत ने बताया कि छात्रों के लिए बजट में काफी कुछ नया है। कांग्रेस नेता महेश रावत, गौरव चौधरी, धर्म सिंह पंवार, महेंद्र चौहान ने कहा कि आवासीय गरीबी दूर करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए गए है। कांग्रेस पंचायत प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि पर्वतीय राज्यों के लिए 12 सौ करोड़ का बजट सराहनीय प्रयास है।

वन रैंक वन पेंशन को सराहा

वन रैंक वन पेंशन देने की घोषणा को छोड़ दें तो संपूर्ण बजट निराशाजनक है। इसमें कोई दीर्घकालीक निर्णय नहीं लिए गए। महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। पेट्रोलियम पदार्थों और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की मूल्यवृद्धि पर रोक का कोई प्रावधान नहीं रखा गया, इसी से गरीब तबका सबसे अधिक प्रभावित है। एलपीजी सिलेंडरों में बढ़ोत्तरी हुई, मगर यह लागू हो इसकी कोई गारंटी नहीं।
नेता संजय शास्त्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता

बजट में गरीब लोगों के लिए कुछ और प्रावधान होने चाहिए, जिससे महंगाई से राहत मिलती। वन रैंक, वन पेंशन लागू होने से पूर्व सैनिकों के बड़े वर्ग को इसका लाभ मिलेगा। उत्तराखंड पूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक संगठन लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। प्रकरण 2006 से लंबित था। अर्द्धसैनिक बलों को भी ईसीएच आदि सुविधाएं भी मिलनी चाहिए थीं।
- महावीर खरोला, कांग्रेस नेता

उद्यमियों की नजर में बजट

इन्हें लगा अच्छा
बजट अच्छा पर सर्विस टैक्स छूट और बढ़ती केंद्र के अंतरिम बजट में आटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए काफी राहत भरी घोषणाएं हैं। एक्साइज ड्यूटी में कमी की गई है, जिससे इन सेक्टर में बूम की उम्मीद है। मंदे पड़े सेक्टर को धक्का लगेगा। जीडीपी रेट बेहतर बताया है।

अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। लेकिन कुछ कमी भी रही। मसलन उत्तराखंड में हाल में आई आपदा के मद्देनजर सर्विस टैक्स की छूट को और बढ़ाया जाना चाहिए था। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कोई घोषणा होनी चाहिए थी पर कुल मिलाकर बजट अच्छा है।
पंकज गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड।

बजट बेहतर पर एसईजेड पर भी बात होती
एक नजर में कहें तो केंद्र का अंतरिम बजट अच्छा है। लोगों पर कोई नया कर नहीं थोपा गया है। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर फोकस करते हुए कैपिटल गुड्स पर एक्साइज ड्यूटी में दो फीसदी की कमी की गई है। इसे 12 से घटाकर 10 फीसदी किया गया है, जिसका बेहद रिस्पांस मिलेगा। इसके अलावा एक्साइज में छह से चार फीसदी की घटोत्तरी का असर आटो सेक्टर पर देखने को मिलेगा। उत्तराखंड के लिए कुछ और घोषणाएं हुईं होती तो बेहतर होता। मसलन एसईजेड पर बात हुई होती तो निश्चित रूप से राज्य के भविष्य के लिए अच्छा होता।
अनिल मारवाह, महासचिव, प्रातीय इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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इन्हें लगी निराशा

बजट पूरी तरह निराशाजनक है। एक्साइज ड्यूटी में कमी की गई, लेकिन सेंट्रल एक्साइज की छूट को बढ़ाया जाना चाहिए था। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कोई प्रावधान बजट में नहीं किया गया है। रोड कनेक्टिविटी की दिक्कत, जिससे इंडस्ट्री सबसे ज्यादा जूझ रही है, उस पर कोई बात नहीं की गई। कुल मिलाकर उद्योगपतियों, निवेशकों के लिए यह बजट निराशा भरा है।
अनिल गोयल, प्रांतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल

व्यापारियों के हाथ तो कुछ भी नहीं लगा
अगर केवल मैन्युफैक्चरिंग में कैपिटल गुड्स की दो फीसदी की छूट छोड़ दें तो व्यापारियों के हाथ कुछ नहीं आया। सरकार ने यह केवल चुनाव को देखते हुए आम आदमी को खुश करने की कोशिश की है, जिसमें वह ज्यादा कामयाब नहीं रही। फौजियों के लिए वन रैंक, वन पेंशन की बात कही गई है। यह अभी सैद्धांतिक मंजूरी है। इसके अलावा सड़कों, व्यापार के बढ़ावे के लिए कोई बात बजट में नहीं कही गई है।
उमेश अग्रवाल, दून उद्योग व्यापार मंडल 
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