वर्ष 2014-15 के लिए बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने 30353.78 करोड़ रुपये का बजट सदन के पटल पर रखा। एक बार फिर टैक्स न लगाने की परंपरा को निभाया गया। कर रियायतों में वित्त मंत्री ने संयम से काम लिया।
आपदा पर खास फोकस
बजट में आपदा पर फोकस रहा और इस मद में सरकार ने पिछले साल की तुलना में बजट दस गुना बढ़ा दिया। सड़क और पुल के लिए अलग से 140 करोड़ की व्यवस्था भी की गई।
आगे आने वाले चुनावों का दबाव भी बजट पर दिखाई दिया। सरकार ने हर वर्ग को कुछ न कुछ देने की कोशिश की। निचले वर्ग को रिझाया और पहाड़ केप्रति अपने लगाव को जगजाहिर करने की कोशिश की।
इन्हें हो सकती है मायूसी
हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का पहला बजट उद्यमियों, शिक्षकों, कर्मचारियों को जरूर मायूस कर सकता है। पर इसके अलावा अल्पसंख्यक और अन्य वर्ग के लिए सरकार ने कोई न कोई व्यवस्था जरूर की।
एक बार फिर गैर योजनागत खर्च ने सरकार को चिंता में डाला। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने माना की सरकारी खर्च पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
निचले तबके को रिझाया
बजट में निचले तबके को रिझाने की भी कोशिश हुई। कुपोषण से निपटने के लिए राशन कार्ड पर दो किलो नमक और दो किलो दाल देने की घोषणा हुई।
राज शिल्पियों, पुरोहित, ग्रंथियों, मौलवियों एवं पादरियों के लिए अलग से पेंशन की बात भी वित्त मंत्री ने की।
किसान, बुजुर्ग और युवाओं को विशेष
किसानों के लिए वृद्धावस्था पेंशन की घोषणा की गई तो दूसरी तरफ 60 से ऊपर के आयु के लोगों को निशुल्क तीर्थयात्रा पर ले जाने का ऐलान किया गया।
भेड़ एवं बकरी पालन के लिए अलग से मंत्रालय की स्थापना करने, युवाओं की उम्मीद को बनाए रखने के लिए सरकार ने अभियान के रूप में रिक्त पदों को भरने का इरादा जताया।
दिखा पहाड़ प्रेम
पहाड़ के लगाव को बजट में जाहिर करने की भी कोशिश की गई। पहाड़ के लिए चकबंदी लागू करने और ट्रामा सेंटर स्थापित करने की बात सरकार ने की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व संसदीय क्षेत्र हरिद्वार का भी ध्यान रखा गया।