वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन कोषागार में बजट खपाने के मामलों की भरमार रही। विभागों को बजट 30 मार्च को जारी किया गया और 31 मार्च तक खर्च करने की हिदायत थी। साथ ही उपयोग प्रमाण पत्र शासन को मुहैया कराने को कहा गया था।
सेवा योजना विभाग को ढाई करोड़ रुपए का बजट मिला है, जिसे एक दिन में खर्च करना था। जनजाति कल्याण निगम को 30 मार्च को छह करोड़ 75 लाख रुपए का बजट आवंटित किया गया।
इसी तरह जल संस्थान समेत कई विभाग थे, जिन्हें बजट खर्च करने के लिए सिर्फ एक दिन दिया गया। वित्तीय वर्ष के अंतिम दो दिन शासन से लेकर कोषागार तक बजट जमा करने और बिलिंग के लिए मारामारी रही।
वित्तीय स्वीकृतियां लेकर लोग रात तक कोषागार आते रहे। इस व्यवस्था ने सवाल खड़ा कर दिया कि विभिन्न विभागों की परियोजनाओं का बजट वित्तीय वर्ष के आखिरी एक-दो दिन में ही क्यों जारी किया जाता है? जो काम विभाग साल भर में नहीं कर पाए, उसे एक दिन में कैसे कर पाएंगे?
जिन विभागों को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन शाम को वित्तीय स्वीकृति मिली है, उनके बजट का क्या होगा? इसका जवाब विभागीय अफसरों के पास नहीं है। इस संबंध में मुख्य कोषाधिकारी जगत सिंह चौहान ने कहा कि बजट विभागों के खातों में भेज दिया जा रहा है। खर्च करना उनकी जिम्मेदारी है।
अंतिम दिन आए 285 करोड़ के बिल
मुख्य कोषाधिकारी जगत सिंह चौहान ने बताया कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 285 करोड़ रुपए के बिल आए। 492 बिल मुख्य कोषागार में और पूरे जिले के उप कोषागारों में 712 बिल जमा हुए।
इस तरह होता है खेल
विभागीय सूत्रों के मुताबिक विभाग बजट अपने खातों में जमा कर लेते हैं। इसमें बैंक और दूसरी एजेंसियों की मिलीभगत होती है। इसमें पहले से थोड़ा बहुत काम दिखाकर फाइल बना ली जाती है। इसके बाद बजट खपा दिया जाता है।
कई कागजात बैक डेट में तैयार कर लिए जाते हैं। हालांकि बजट के कागजात पर अंकित होता है कि यह धनराशि वित्तीय वर्ष में ही खर्च की जाए, लेकिन इसे अगले वित्तीय वर्ष में समायोजित करने की बात कही जाती है।
विभाग- चिकित्सा।
बजट- एक करोड़ दो लाख 57 हजार।
बजट जारी- 30 मार्च।
कार्य- वृत्त निर्माण कार्य
खर्च की अंतिम तिथि- 31 मार्च। इसी दिन शासन को उपयोग प्रमाण पत्र भी देना है।
विभाग- आईटीआई राजपुर रोड।
बजट- तीन करोड़ 26 लाख।
बजट जारी- 30 मार्च।
कार्य- निर्माण संबंधी
खर्च की अंतिम तिथि- 31 मार्च। इसी दिन शासन को उपयोग प्रमाण पत्र भी देना है।
यह सिस्टम गलत है। साल चार तिमाही में बंटा होता है। बजट हर तिमाही में जारी किया सकता है। राजस्व वसूली भी एक मामला होता है, लेकिन बजट पहले जारी होना चाहिए।
- आरएस टोलिया, पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन बजट जारी करने की प्रथा बंद होनी चाहिए। इससे भ्रष्टाचार खत्म होगा। बजट हर महीने क्यों नहीं जारी किया जाता? 30 मार्च को बजट जारी कर 31 मार्च को खर्च करने के लिए कहा जाता है और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी मांगा जाता है। यह व्यवस्था हास्यास्पद है।
- प्रदीप कोहली, प्रांतीय सचिव, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
कई विभागों का बजट सरेंडर
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन मंगलवार को पूरा बजट खर्च नहीं कर पाने वाले कई विभागों ने बजट सरेंडर कर दिया। दोपहर 12 बजे तक ग्रामीण निर्माण विभाग ने 12 लाख 48 हजार, जिला पूर्ति विभाग ने 17 लाख, समाज कल्याण विभाग ने एक करोड़ 28 लाख छह लाख, तहसील ने 50 लाख, कृषि विभाग ने 45 लाख, पुलिस ने 50,61,000 अधिशासी अभियंता अनुसंधान अव्यवस्थापना खंड ने 37 लाख बजट कोषागार को लौटाया।
विभागीय अफसरों ने बताया कि 40 फीसदी सरकारी विभागों ने विभिन्न परियोजनाओं का बजट इस्तेमाल करने में असफल रहने पर लौटा दिया है।