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Uttarakhand Budget 2021: बजट में अन्नदाता का रखा ख्याल, जैविक खेती में होगा कमाल

Thu, 04 Mar 2021 09:55 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भराड़ीसैंण
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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त्रिवेंद्र सरकार ने चुनावी वर्ष में पांचवें बजट में अन्नदाता और खेती किसानी का खास ख्याल रखा है। जैविक और क्लस्टर आधारित खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर बजट में फोकस किया गया है। कृषि कर्म एवं अनुसंधान के लिए बजट में 1108 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

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बजट में एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना (आईएमए विलेज) के लिए 12 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक ब्लाक में एक-एक गांव का चयन किया गया है। जिसमें 100 किसानों के समूह बना कर क्लस्टर आधारित कृषि, बागवानी के साथ पशुपालन, दुग्धपालन, मशरूम, शहद उत्पादन समेत अन्य कार्य किए जाएंगे। वहीं, जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 87 करोड़ 56 लाख रुपये दिए गए। वर्तमान में 3900 क्लस्टरों में 78 हजार हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के अधीन लाया जा रहा है। जैविक उत्पादों से किसानों को बाजार में ज्यादा मूल्य मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्रफल की 33 प्रतिशत भूमि पर जैविक खेती की जा रही है। 

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मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के लिए बजट में 20 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 67.94 करोड़ की व्यवस्था की गई है। संयुक्त सहकारी खेती के जरिये सहकारी समितियों की ओर से सात हजार बेमौसमी सब्जी उत्पादन इकाई, दो हजार मशरूम उत्पादन इकाई, दो हजार मौन पालन, एक हजार सेब उद्यान इकाई के अलावा दाल, मसाला उत्पादन के कार्य किए जाएंगे। 

प्राथमिक सेब उत्पादक समितियों, उत्तराखंड सेब उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ के माध्यम से सेब का प्रसंस्करण व मार्केटिंग के लिए मूल्य शृंखला स्थापित की जाएगी। इससे प्रदेश के 20 हजार सेब उत्पादकों को लाभ मिलेगा। 

काशीपुर में 41 एकड़ भूमि पर बनेगा एरोमा पार्क
प्रदेश में औषधीय, जड़ी बूटी व सगंध फसलों का मूल्य संवर्धन करने के लिए काशीपुर में 41 एकड़ भूमि पर एरोमा पार्क बनाया जा रहा है। इस पार्क में एरोमा आधारित उद्योगों को स्थापित किया जाएगा। जिससे किसानों के उत्पाद को बाजार उपलब्ध होगा।

ग्रोथ सेंटर से कृषि उत्पादों को मिलेगी पहचान
सरकार ने स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए ग्रोथ सेंटर योजना शुरू की है। अब तक 106 ग्रोथ सेंटर के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। एग्रो बिजनेस, स्थानीय प्रसाद, बेकरी उत्पाद, एरोमा आधारित उत्पाद, मसाले, शहद, मशरूम, बद्री गाय के ए-2 दूध व घी की मार्केटिंग के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किए जाएंगे।

गन्ना किसानों को होगा समय पर भुगतान
प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जिले के किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए बजट में 245 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को पेराई सत्र में गन्ने का भुगतान समय से हो सकेगा। प्रदेश के मैदानी जिलों में सबसे ज्यादा गन्ने की पैदावार की जाती है। लेकिन किसानों की शिकायत रहती है कि गन्ने का भुगतान समय पर नहीं होता है। चीनी मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान है।

यह भी की गई है व्यवस्था
- मुख्यमंत्री घसयारी कल्याण योजना के लिए 25 करोड़ का प्रावधान।
- दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण मिशन के लिए 47 करोड़ की राशि।
- 1444 फार्म मशीनरी बैंक और 235 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित।
- धान खररू द पर 1988 करोड़ 58 लाख रुपये का किसानों को भुगतान।

किसा विभाग को कितना मिला

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 57400.32 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इसमें 44036.31 करोड़ राजस्व लेखे और और13364.01 करोड़ पूंजी लेखे में खर्च का अनुमान है।

बजट में राजस्व घाटा अनुमानित नहीं है, जबकि राजकोषीय घाटा 8948.53 करोड़ है। रावत का यह पांचवां और मौजूदा शासनकाल का आखिरी बजट है। बजट में राज्य के बाशिंदों पर किसी तरह का नया कर नहीं लगाया गया है। बजट में आत्मनिर्भर उत्तराखंड, वोकल फॉर लोकल, खेत-खलिहान, गांव-किसान के साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। 

11 स्थानों पर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के लिए 17 करोड़ 62 लाख

चालकों की लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के साथ मिलकर एचएएमएस सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। इसके तहत देहरादून, हल्द्वानी, ऋषिकेश, हरिद्वार सहित 11 स्थानों पर ऑटोमेटेड ड्राईविंग टेस्ट ट्रैक विकसित किए जा रहे हैं। देहरादून में यह ट्रैक विकसित हो चुका है। सरकार ने इस योजना के लए 17 करोड़ 62 लाख रुपये का प्रावधान किया है।

689 सरकारी स्कूलों के लिए 1154 करोड़

सरकार की आने वाले समय में प्रदेश के डिग्री कॉलेजों के छात्रों की सभी डिग्री डिजी लॉकर में लाने की योजना है। तीन लाख एक हजार डिजी लॉकर का पंजीकरण किया जा चुका है। 17 लाख 81 हजार प्रमाणपत्र डिजीलॉकर के माध्यम से प्रदान किए जा चुके हैं। स्कूलों में भौतिक संसाधनों की मजबूती के तहत 689 सरकारी स्कूलों में मरम्मत, भवन निर्माण और प्रयोगशाला निर्माण के लिए सरकार ने 1154 करोड़ 62 लाख रुपये का प्रावधान किया है। 

शराब की तस्करी रोकने को ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली 

शराब की हेराफेरी और तस्करी रोकने के लिए सरकार आबकारी विभाग में ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लेकर आ रही है। इसके तहत सॉफ्टवेयर के जरिये शराब ले जाने वाले वाहनों के रास्ता बदलने से लेकर रुकने तक की पूरी जानकारी मिलेगी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी की गई तो सॉफ्टवेयर तुरंत इसकी जानकारी विभाग को देगा। सॉफ्टवेयर को फैक्टरी से गोदाम तक शराब लाने वाले जीपीएस वाहनों से जोड़ा जाएगा। 

उद्योग नीति व महिला उद्यमियों के लिए 132 करोड़ 50 लाख

सरकार ने उद्योग विभाग की नीतियों जैसे महिला उद्यमियों की विशेष प्रोत्साहन योजना, मेगा इंडस्ट्रियल, मेगा टैक्सटाइल के तहत अनुदान, ग्रोथ सेंटरों की स्थापना व संचालन आदि के लिए 132 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया है। वित्त मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि विकास, संयोजकता और रोजगार के नजरिये से केंद्र सरकार की अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत उत्तराखंड में भी कलस्टर निर्माण को खुरपिया फार्म में एक हजार दो एकड़ भूमि प्रस्तावित की गई है।

शहरों के विकास को 695 करोड़

सरकार ने शहरी विकास के लिए बड़ी सौगात दी है। अमृत योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, नगरीय अवस्थापना सुदृढ़ीकरण, जल जीवन मिशन शहरी, स्मार्ट सिटी आदि योजनाओं के लिए सरकार ने 695 करोड़ 16 लाख रुपये बजट का प्रावधान किया है।

62 हजार से ज्यादा को उद्योगों में मिलेगा रोजगार

अप्रैल 2017 से दिसंबर 2020 तक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना के तहत 3241 करोड़ 14 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है। इन उद्योगों से प्रदेश में 78 हजार 778 लोगों को रोजगार मिला। इसी प्रकार, 47 वृहद उद्यम स्थापित हुए, जिनमें 2546 करोड़ 99 लाख का पूंजी निवेश हुआ। इनसे सात हजार 366 लोगों को रोजगार मिला। सरकार ने अक्तूबर 2018 में अंतरराष्ट्रीय निवेश मेला डेस्टिनेशन उत्तराखंड का आयोजन किया था। इसके तत 507 परियोजनाओं की ग्राउंडिंग की जा चुकी है। 25 हजार करोड़ का पूंजी निवेश होगा और 62 हजार 428 लोगों को रोजगार मिलेगा।


सूबे के 22 आईटीआई में प्रशिक्षण सह उत्पादन 

आईटीआई में प्रशिक्षण के साथ ही उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना के तहत अभी तक 18 आईटीआई में यह कार्य शुरू किया जा चुका है। सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में 22 आईटीआई में प्रशिक्षण सह उत्पादन गतिविधियां शुरू करेगी। इसी प्रकार, ऑन द जॉब ट्रेनिंग के तहत 436 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब देहरादून, दिनेशपुर, काशीपुर और हरिद्वार के आईटीआई में प्रशिक्षण देने के लिए छात्रावासों को स्ट्राइव योजना के अंतर्गत सुसज्जित किया जा रहा है। वर्तमान में ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग के तहत 19 आईटीआई में 500 युवाओं को लाभ दिया जा चुका है। इनका 50 प्रतिशत प्रशिक्षण आईटीआई और 50 प्रतिशत प्रशिक्षण उद्योगों में दिया जा रहा है। 

नियोजित कर्मकारों को स्थायी कार्मिकों की भांति मिलेंगी सुविधाएं

प्रदेश में उत्तर प्रदेश औद्योगिकी सेवा योजना मॉडल स्थायी आदेश 1992 को 2020 में संशोधित किया गया है। इससे उद्योगों को व्यापार की आवश्यकता के अनुसार कर्मकारों को नियोजित करने में आसानी होगी। इन नियोजित कर्मकारों को स्थायी कर्मकारों की भांति ही लाभ मिल सकेंगे। इसी प्रकार, उत्तर प्रदेश संविदा श्रम विनियमन और उत्पादन नियमावली 1975 में संशोधन किया गया है। इससे संविदाकारों को पोर्टल पर स्व नवीनीकरण की सुविधा मिलेगी। 

सौर ऊर्जा परियोजनाओं से पांच हजार लोगों को स्वरोजगार

सौर ऊर्जा नीति के माध्यम से प्रदेश में 276 मेगावाट की परियोजना स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 203 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। इन परियोजनाओं के परिचालन से राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से करीब पांच हजार लोगों को स्वरोजगार मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत भी प्रदेश के दस हजार युवाओं, प्रवासियों और लघु सीमांत कृषकों को 25 किलोवाट क्षमता तक के सोलर पावर प्लांट की स्थापना पर काम चल रहा है। पिरूल नीति के अंतर्गत तीन चरणों में कुल 62 परियोजनाएं आवंटित की गई हैं। इनमें से सात परियोजनाओं से बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है जबकि बाकी परियोजनाएं स्थापित करने का काम चल रहा है।
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हरिद्वार में नए नए गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन का निर्माण

केंद्र सरकार की इंटिग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना के तहत 301 करोड़ रुपये की लागत से कुंभ क्षेत्र हरिद्वार में विद्युत लाइनों को भूमिगत करने का काम चल रहा है। इस योजना के तहत 182 मेगा वोल्ट एंपीयर क्षमता के दस नए गैस इंसुलेटेड सब स्टेशनों का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे हरिद्वार में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी। वहीं, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 94 गांवों का शत प्रतिशत विद्युतीकरण और 43 कृषि फीडरों का पृथककरण किया जा चुका है। योजना के तहत छह हजार 139 तोकों में विद्युतीकरण, सुदृढ़ीकरण के कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं और बाकी 226 तोकों में काम प्रगति पर है। 

महिलाओं, किसानों, बुजुर्गों के कल्याण को 1152 करोड़

समाज कल्याण विभाग की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों, निराश्रित विधवाओं, दिव्यांगजनों, किसानों, परित्यक्त महिलाओं को पेंशन देकर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 792 करोड़ रुपये की धनराशि व्यय की गई, जिसे चार लाख 23 हजार 512 वृद्धजनों, एक लाख 48 हजार 418 निराश्रित विधवाओं, 72 हजार 302 दिव्यांगजनों, 17 हजार 749 किसानों और तीन हजार 380 परित्यक्त निराश्रित महिलाओं को पेंशन देकर लाभान्वित किया गया।

सरकार ने वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगजन पेंशन की राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रतिमाह किया गया। सामाजिक सुरक्षा की इन योजनाओं के लिए सरकार ने 1152 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया है।

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के लिए 40 करोड़

सरकार ने केंद्र पोषित प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अल्पसंख्यक बाहुल्य विकासखंडों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 40 करोड़ 35 लाख रुपये का प्रावधान किया है। अल्पसंख्यक छात्राओं में शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए मुंशी, मौलवी एवं आलिम परीक्षा में सस्थागत छात्राओं द्वारा 60 प्रतिशत या अधिक अंक लाने पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है। वित्तीय वर्ष्ज्ञ 2020-21 में इस योजना के अंतर्गत एक हजार 384 छात्राओं को लाभ दिया गया है। इसी प्रकार, सरकार ने अनुसचित जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए 25 करोड़ 65 लाख रुपये का प्रावधान किया है। 

गर्भवतियों को पांच हजार रुपये

सरकार ने समेकित बाल विकास योजना की 105 बाल विकास परियोजनाओं में 14 हजार 947 आंगनबाड़ी केंद्रों और पांच हजार 120 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री स्कूल किट और दवाई किट उपलबध कराने के साथ ही 35 हजार 14 कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस के रूप में दो साड़ी भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के लिए 15 करोड़ 43 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

वहीं, अनुपूरक पोषाहार योजना के तहत छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को लाभ देने को सरकार ने राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत 43 करोड़ 71 लाख और अनुपूरक पोषाहार के लिए 482 करोड़ 73 लाख रुपये का प्रावधान किया है। सरकार ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत 75 हजार गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पांच हजार रुपये प्रति महिला के हिसाब से लाभ देने का ऐलान किया है। सरकार ने मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए भी 24 करोड़ 75 लाख रुपये का प्रावधान किया है। जबकि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के तहत बच्चों को दूध उपलब्ध कराने के लिए 13 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 

नंदा गौरा योजना को 120 करोड़

नंदा गौरा योजना के लिए सरकार ने 120 करोड़ का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत पात्र परिवार की दो बालिकाओं को जन्म के समय प्रथम किश्त के रूप में 11 हजार और दूसरी किश्त के रूप में 12वीं पास करने व अविवाहित होने पर 51 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है। वहीं, किशोरी बालिकाओं में स्वच्छता एवं रोग मुक्त रखने के लिए आंनगाबड़ी केंद्रों के माध्यम से सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है7

38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए 110 करोड़

सरकार ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए 110 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। वहीं, खेल महाकुंभ के तहत नए वित्तीय वर्ष में दो लाख 80 हजार युवा खिलाड़ियों के प्रतिभाग करने का लक्ष्य रखा गया है। महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम और हल्द्वानी स्थित स्पोर्ट्स स्टेडियम को खेल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पद तालिका में उच्च स्थान पाने वाले खिलाड़ियों और राज्य के उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध किया जा रहा है।

कौशल प्रशिक्षण के लिए 140 करोड़

मोटर साइकिल टैक्सी योजना के तहत युवाओं को 60 हजार से एक लाख 25 हजार रुपये तक का दो वर्षों तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के चार हजार 469 युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने 140 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री ई-रिक्शा कल्याण योजना के तहत प्रदेश में 23 करोड़ 64 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अब तक 35 हजार 536 युवाओं को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया जा चुका है, जिनमें से 11 हजार 32 युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। प्रदेश में दूरस्थ गांवों तक युवाओं को जीएसटी का प्रशिक्षण दिया गया है, जिसके तहत एक हजार 698 जीएसटी मित्र कार्यरत हैं।
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