त्रिवेंद्र सरकार ने चुनावी वर्ष में पांचवें बजट में अन्नदाता और खेती किसानी का खास ख्याल रखा है। जैविक और क्लस्टर आधारित खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर बजट में फोकस किया गया है। कृषि कर्म एवं अनुसंधान के लिए बजट में 1108 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
बजट में एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना (आईएमए विलेज) के लिए 12 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश के प्रत्येक ब्लाक में एक-एक गांव का चयन किया गया है। जिसमें 100 किसानों के समूह बना कर क्लस्टर आधारित कृषि, बागवानी के साथ पशुपालन, दुग्धपालन, मशरूम, शहद उत्पादन समेत अन्य कार्य किए जाएंगे। वहीं, जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 87 करोड़ 56 लाख रुपये दिए गए। वर्तमान में 3900 क्लस्टरों में 78 हजार हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के अधीन लाया जा रहा है। जैविक उत्पादों से किसानों को बाजार में ज्यादा मूल्य मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्रफल की 33 प्रतिशत भूमि पर जैविक खेती की जा रही है।
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मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना के लिए बजट में 20 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 67.94 करोड़ की व्यवस्था की गई है। संयुक्त सहकारी खेती के जरिये सहकारी समितियों की ओर से सात हजार बेमौसमी सब्जी उत्पादन इकाई, दो हजार मशरूम उत्पादन इकाई, दो हजार मौन पालन, एक हजार सेब उद्यान इकाई के अलावा दाल, मसाला उत्पादन के कार्य किए जाएंगे।
प्राथमिक सेब उत्पादक समितियों, उत्तराखंड सेब उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ के माध्यम से सेब का प्रसंस्करण व मार्केटिंग के लिए मूल्य शृंखला स्थापित की जाएगी। इससे प्रदेश के 20 हजार सेब उत्पादकों को लाभ मिलेगा।
काशीपुर में 41 एकड़ भूमि पर बनेगा एरोमा पार्क
प्रदेश में औषधीय, जड़ी बूटी व सगंध फसलों का मूल्य संवर्धन करने के लिए काशीपुर में 41 एकड़ भूमि पर एरोमा पार्क बनाया जा रहा है। इस पार्क में एरोमा आधारित उद्योगों को स्थापित किया जाएगा। जिससे किसानों के उत्पाद को बाजार उपलब्ध होगा।
ग्रोथ सेंटर से कृषि उत्पादों को मिलेगी पहचान
सरकार ने स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए ग्रोथ सेंटर योजना शुरू की है। अब तक 106 ग्रोथ सेंटर के प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं। एग्रो बिजनेस, स्थानीय प्रसाद, बेकरी उत्पाद, एरोमा आधारित उत्पाद, मसाले, शहद, मशरूम, बद्री गाय के ए-2 दूध व घी की मार्केटिंग के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किए जाएंगे।
गन्ना किसानों को होगा समय पर भुगतान
प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जिले के किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए बजट में 245 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को पेराई सत्र में गन्ने का भुगतान समय से हो सकेगा। प्रदेश के मैदानी जिलों में सबसे ज्यादा गन्ने की पैदावार की जाती है। लेकिन किसानों की शिकायत रहती है कि गन्ने का भुगतान समय पर नहीं होता है। चीनी मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये का बकाया भुगतान है।
यह भी की गई है व्यवस्था
- मुख्यमंत्री घसयारी कल्याण योजना के लिए 25 करोड़ का प्रावधान।
- दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण मिशन के लिए 47 करोड़ की राशि।
- 1444 फार्म मशीनरी बैंक और 235 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित।
- धान खररू द पर 1988 करोड़ 58 लाख रुपये का किसानों को भुगतान।