केंद्रीय बजट से उत्तराखंड के अन्नदाता और पहाड़ी इलाके गदगद हैं। आम बजट में कृषि क्षेत्र को विशेष तवज्जो देने से देवभूमि के किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में न सिर्फ पहाड़ों में खेती लहलहाएगी और उनकी माली हालत सुधरेगी, बल्कि राज्य के जैविक उत्पादों का पूरी दुनिया में डंका बजेगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 10.67 लाख किसान 843000 हेक्टेयर में खेतीबाड़ी करते हैं। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 10.56 प्रतिशत है। राज्य की 58 फीसदी जनसंख्या खेतीबाड़ी पर निर्भर है। खेतीबाड़ी को बढ़ावा देने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दर्जन भर योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद किसानों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। आम बजट में जैविक खेती को बढ़ावा देने, आपदाग्रस्त गांवों को अंत्योदय योजना के तहत विशेष बजट देने, मनरेगा का बजट बढ़ाकर 38500 करोड़ करने संबंधी प्रस्तावों से राज्य में खेतीबाड़ी को मदद मिलेगी।
सिंचाई के ‘स्पेशल फंड’ से लबालब होंगे खेत
बजट में सिंचाई योजनाओं के लिए 20000 करोड़ का विशेष पैकेज दिए जाने से भी किसानों को उम्मीद जगी है। नाबार्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य में 843000 हेक्टेयर में से महज 3.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों, सरकारी ट्यूबवेल, पंप सेट से हो पाती है।
प्रतिशत के लिहाज से महज 30.93 प्रतिशत खेतों की सिंचाई हो पाती है, जबकि बाकी खेतीबाड़ी वर्षा आधारित है। बजट की कमी के चलते केंद्र एवं राज्य सरकार की तमाम छोटी बड़ी सिंचाई परियोजनाएं या तो शुरू ही नहीं हो पाई और यदि शुरुआत हुई तो आधी अधूरी हैं।
अब जबकि आम बजट में सिंचाई परियोजनाओं के लिए 20000 करोड़ के विशेष पैकेज की व्यवस्था की गई तो किसानों को उम्मीद जगी है कि उनकी खेतीबड़ी पानी के अभाव में चौपट नहीं होगी।