केंद्र सरकार के नए बजट से अल्पसंख्यक कल्याण, बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण और अनुसूचित जाति, जनजाति के उत्थान के लिए बड़ी उम्मीदें हैं।
शासन ने इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भी भेजे हैं, ऐसे में उम्मीद है कि नए बजट में इसके लिए प्रावधान कर दिया जाएगा। अल्पसंख्यक बेटियों की तालीम के लिए अलग से बजट की जरूरत महसूस की जा रही है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के तहत कई तरह की पेंशन दी जाती हैं। इसमें पारिवारिक लाभ योजना भी शामिल है।
केंद्र सरकार ने इस मद की पूरी धनराशि आवंटित नहीं की थी। अब उम्मीद की जा रही है कि नए बजट में इस धनराशि के साथ और भी पैसा दिया जाएगा। केंद्र से धनराशि कटौती होने से अनुसूचित जाति, जनजाति की विभिन्न योजनाओं को संचालित करने में बाधा आ रही है। नए बजट से उम्मीद की जा रही है कि इस मद में और भी प्रावधान किए जाएंगे।
समेकित बाल संरक्षण योजना और समेकित बाल विकास योजना तथा महिला सशक्तीकरण की योजनाओं में केंद्र की बहुत मदद नहीं मिली है। इस क्षेत्र पर केंद्र सहायतित योजनाओं पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया है। इन योजनाओं के मद में भी बजट आवंटन का प्रावधान की नए बजट से उम्मीद है।
इन योजनाओं के तहत कई संस्थान खोले जाने हैं जिनमें स्टाफ की भी नियुक्ति की जाएगी। अगर नए बजट में इस मद में धनराशि आवंटित कर दी जाती है तो योजनाएं धरातल पर उतर आएंगी।
केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यक लड़कियों की पढ़ाई के लिए विशेष प्रावधान होना चाहिए। इनकी पढ़ाई के लिए अलग से बजट किया जाए। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फॉर माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशंस को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- आरए खान, सदस्य प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम कमेटी, उत्तराखंड
केंद्रीय बजट में विभिन्न छात्रवृत्तियों के मद की धनराशि बढ़ाई जाए जिससे खासतौर पर अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई ढंग से हो सके। समेकित बाल संरक्षण योजना तथा बाल विकास और महिला सशक्तीकरण के लिए अलग से बजट का प्रावधान होना चाहिए।
- एसके मट्टू, सेवानिवृत्त आईएएस