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बसपा नेता शहजाद को भाजपा से मोहब्बत पड़ी भारी, वहीं संजय गुप्त को भाजपा ने दिया नोटिया

Sun, 15 Jul 2018 06:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पार्टी से निष्कासित हुए मो. शहजाद
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बसपा नेता मो. शहजाद को भाजपा से मोहब्बत करना भारी पड़ गया। उन्हें फिर से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। महासचिव सतीश कुमार ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। वहीं भाजपा विधायक संजय गुप्ता को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ बोलना भारी पड़ गया। उन्हें भाजपा की तरफ से नोटिस भेजा गया है।

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दरअसर, बसपा नेता मो. शहजाद के घर पर शनिवार को ‘भाजपा सरकार’ मौजूद थी। बहाना भले ही शादी-ब्याह का था, लेकिन कहीं ओर भी निशाना था। ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए हर तरह की रणनीति बुन रही भाजपा के शहजाद पर डोरे डालने के प्रयास छिपे नहीं रह गए हैं। इसी को शहजाद के पार्टी से निष्कासित किए जाने का कारण माना जा रहा है।

बता दें कि दो बार शहजाद बसपा से निष्कासित हो चुके हैं। माना जा रहा है कि लोस चुनाव में हरिद्वार सीट से जुड़ी रणनीति के एक हिस्से में भाजपा ने शहजाद को भी रखा है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और शहजाद की हमेशा से मित्रता रही है। फिर चाहे वह बसपा में रहे हों या वहां से निष्कासित। कौशिक अपने साथ शनिवार को जिस तरह से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत को शहजाद के घर लेकर गए, उसे राजनीति के जानकार बहुत सामान्य नहीं मान रहे हैं।

शहजाद के पार्टी से निष्कासित किए जाने की घोषणा रविवार को शिवालिक नगर स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में की गई। प्रदेश महासचिव नत्थू सिंह, प्रदेश महासचिव सतीश कुमार सिंह, सूरजमल, जिलाध्यक्ष राजेश कुमार ने संयुक्त रूप से पत्रकारों से वार्ता में जानकारी दी कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद को पार्टी से निष्कासित किया गया है।

कहा उन्होंने पार्टी को गुमराह करने का काम किया है। वे भाजपा के संपर्क में रहे हैं। कहा पूर्व विधायक ने हाल में राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती से पूर्व की गलतियों की माफी मांगते हुए शामिल हुए थे। पूर्व विधायक को चार साल में तीसरी बार निष्कासित करने के सवाल पर कहा उन्होंने भरोसा तोड़ा है। कहा भाजपा से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके सरकार के सहयोगियों को अपने यहां पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत बुलाया। यह पार्टी के साथ विश्वासघात है।

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वहीं भाजपा विधायक संजय गुप्ता को भी मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने की सजा मिल गई। उन्हें पार्टी अनुशासन तोड़ने का दोषी माना गया और कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। उनसे एक हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा गया है।

बता दें कि संजय गुप्ता ने कहा था कि मुख्यमंत्री के पास अपने विधायकों के लिए समय नहीं है, लेकिन पूरी सरकार शहजाद के बेटे की शादी में झोटा बिरयानी खाने चली गई। सरकार के पास बसपा विधायक के यहां शादी में जाने का समय है, लेकिन गुरुकुल कांगड़ी में आर्य सम्मेलन हुआ, जिसमें देश भर के आर्य विद्वान आए, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं आए। भाजपा विधायक ने दो टूक कहा कि सरकार पर ब्यूरोक्रेसी हावी है। कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है। 
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