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ससुराल में ही हुई दुल्हन की मेहंदी और हल्दी, पढ़िए अनोखी शादी की कहानी

Tue, 20 Jun 2017 08:31 AM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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आपने यह शायद पहली बार सुना होगा कि किसी लड़की की शादी से पहले होने वाली सभी रस्में ससुराल में ही पूरी हुई।
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श्रीश्री बाला जी सेवा समिति की ओर से 28 निर्धन कन्याओं विवाह समारोह में दुल्हन बनी जसप्रीत ऐसी लड़की है जिसकी शादी से पहले की सभी रस्में ससुराल में पूरी हुई।

अनाथ होने के कारण जसप्रीत की परवरिश कुछ लोगों के सहयोग से एक क्रिश्चन हॉस्टल में हुई। यहीं रहने के दौरान उसकी मुलाकात गांधी ग्राम के रवि यादव से हुई। अब शादी से पूर्व रवि के परिवार वालों ने ही जसप्रीत की हल्दी और मेहंदी की रस्म पूरी की।  
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तीन माह पहले गांधी ग्राम के रवि यादव से हुई मुलाकात

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23 साल की जसप्रीत ने अमर उजाला को बताया कि जब वह 21 दिन की थी, तो उसके पिता की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद उसकी मां भी उसे छोड़ चल बसी।

कुछ समय तक बुआ ने उसे अपने घर रखा। बाद में उन्होंने उसे शहर के एक क्रिश्चन हॉस्टल में छोड़ दिया। शुरुआत में हॉस्टल में फीस न होने के चलते उसकी परवरिश हो गई, लेकिन बाद में हॉस्टल वालों ने भी एक हजार रुपये फीस लेनी शुरू कर दी तो एक महिला ने उसका पूरा खर्च उठाया।

बताया कि हॉस्टल के बाहर अभी दो तीन माह पूर्व ही उसकी मुलाकात होम लोन का काम करने वाले गांधी ग्राम के रवि यादव से हुई। जसप्रीत के पूरी स्थिति बताने पर रवि ने उससे शादी करने का निर्णय ले लिया। इसी बीच निर्धन कन्या विवाह का पता चला तो उन्होंने यहां नाम लिखवा दिया।
 

भाई और भाभी के प्यार से यह संभव हो पाया

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जसप्रीत ने कहा कि वह खुद को बेहद भाग्यशाली मानती है। बताया कि उसे कभी नहीं लगता था कि उसकी शादी होगी। लेकिन रवि के परिजनों, खासकर भाई और भाभी के प्यार से यह संभव हो पाया।

ससुराल में ही पति के भाई-भाभी ने बेहद प्यार से सभी रस्में पूरी करवाई। वहीं से वेडिंग प्वाइंट लेकर आए। इस दौरान भाभी ने जब कहा कि मायके से जा रही हो और लौटकर ससुराल में आओगी तो उसकी आंखें भर आई। जसप्रीत ने कहा कि यदि सभी ससुराल वाले ऐसे ही हों तो बेटियों को मायके से विदाई का दुख न हो।

पिंकी और सीमा बन गए देवरानी-जिठानी 
विवाह समारोह स्थल पर दो सगी बहनें पिंकी और सीमा आकर्षण का केंद्र बनी थी। क्योंकि दोनों मायके से विदा होकर एक ही घर जा रही थी। यानी यह दोनों शादी के बाद देवरानी-जिठानी बन गई। बहनों ने बताया कि उनकी मां नहीं है। पिता ने मजदूरी कर पाला। मामा ने रिश्ता करवाया। एक ही घर के दो भाईयों ने हमें पसंद कर लिया। कहा कि एक ही घर जा रहे हैं इसलिए बेहद खुश हैं।
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दो अनाथ बहनों की भी एक साथ शादी

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विकासनगर निवासी वैशाली और वर्षा के माता-पिता नहीं है। माता-पिता नहीं होने के कारण इन्होंने आठवीं से अधिक पढ़ाई भी नहीं की। दोनों बहनों ने बताया कि माता-पिता की मौत के बाद मामा के साथ रहे। मामा ने ही रिश्ता करवाया और निर्धन कन्या विवाह कार्यक्रम के माध्यम से दोनों की एक साथ शादी भी करवा दी। 

जहां भी जाओ सास की लेना इजाजत
आयोजन स्थल पर श्रीश्री बालाजी समिति के सभी पदाधिकारी कन्याओं के मायके वाले बने थे। पदाधिकारी कन्याओं को बार-बार यही कह रहे थे कि बेटा अभी मायके में हो जो मर्जी कर लो, लेकिन ससुराल जाने के बाद हर बात को सोचना। कांवेंट आफ जीजस एंड मैरी स्कूल की डॉली मैम ने सभी कन्याओं को एक जगह बिठाकर सास को खुश रखने के टिप्स दिए।

उन्होंने कहा कि बेटा आप लोग जहां भी जाओ सास की इजाजत लेकर जाना, इससे सास खुश होती है। कुछ भी काम करो तो पहले भगवान को याद करना। आपके ऊपर है अपने घर को स्वर्ग बनाओगे, सबको प्यार करोगे तो सब आपको भी प्यार करेंगे, खुश रखेंगे इसलिए छोटी-छोटी बातों का हमेशा ध्यान रखें। 
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