खुदकुशी की बढ़ती घटनाओं के चलते लिया था फैसला
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी ने मेडिकल शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण के फैसले पर विवाद होने पर अनिवार्यता की शर्त को हटा लिया है। यदि मेडिकल बोर्ड को लगता है कि कोई छात्र मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है तो उसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण को अनिवार्य करने के पीछे कॉलेज प्रशासन का तर्क था कि छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था।
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मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं के होने वाले मेडिकल परीक्षण में मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण को जोड़ा गया था। अगर कोई छात्र-छात्रा मानसिक तौर पर बीमार मिलता तो इससे मेडिकल कॉलेज में उसके प्रवेश पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि अब इस अनिवार्यता को हटा दिया गया है। अब जरूरत पड़ने पर ही ऐसा किया जाएगा। -डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी।